क्या है व्हाइट फंगस, इसके लक्षण व बचाव।

कोरोना महामारी के बीच फंगल संक्रमण का कहर भी जारी है।  कोरोना संक्रमण के दूसरी लहर के बीच ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस ने लोगो की चिंता बढ़ा दी है।  ये दोनों ही बीमारियां कोरोना से ज्यादा जानलेवा मानी जा रही है।
 विशेषज्ञ के अनुसार बव्हाइट फंगस ब्लैक फंगस संक्रमण से अधिक घातक है क्योकि ये मनुष्य के मस्तिष्क और फेफड़ो को अपनी चपेट में लेकर प्रभावित करता है।  केवल एक अंग नहीं , बल्कि फेफड़ो और ब्रेन से लेकर हर अंग पर असर डालता है।
आइये जानते है व्हाइट फंगस के बारे में विस्तार से। 
 
क्या है व्हाइट फंगस 
व्हाइट फंगस एक गंभीर फंगल इंफेक्शन है सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एन्ड प्रिवेंशन के अनुसार व्हाइट फंगस खून , हार्ट , मस्तिष्क , आँखे , हड्डियों या शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। चिकित्सकीय भाषा में इसे कैंडिडा कहते है, जो रक्त के जरिए होते हुए शरीर के हर अंग को प्रभावित करता है।  व्हाइट फंगस एक तरह का इंफेक्शन है जो कैंडिडायसिस नामक बैक्टीरिया की वजह से होता है।  बच्चो और महिलाओं में इस बैक्टीरिया के पनपने के चांसेस ज्यादा होते है।  यह फंगस कमजोर इम्युनिटी वाले लोगो पर हमला करता है और बच्चे सबसे पहले इस बीमारी का शिकार बनते है। व्हाइट फंगस जीभ या यौन अंगो से शुरू होता है जिसकी वजह से जीभ सफ़ेद  हो जाती है।  इसके बाद यह फेफड़ो , मस्तिष्क और भोजन नली जैसे अन्य अंगो तक पहुंचने लगता है। हालाँकि इस फंगस से प्रभावित जो मरीज आ रहे है , ये जरूरी नहीं की वे कोविड से संक्रमित हो , हालाँकि लंग्स पर असर होने के कारण उनके लक्षण कोरोना से लगभग मिलते -जुलते होते है जैसे -साँस फूलना या कई बार सीने में दर्द।
किन लोगो को ज्यादा खतरा है 
जिन लोगो की इम्युनिटी कमजोर होती है , उन्हें ये संक्रमण हो सकता है।  अगर वे संक्रमित वनस्पतियो या फिर दूषित पानी के सम्पर्क में आए।  इसके अलावा कोविड संक्रमित गंभीर मरीज , जिन्हे ऑक्सीजन चढ़ाई जा रही हो , उन्हें भी संक्रमण हो सकता है।  अगर नाक  या मुँह पर लगे उपकरण फंगलयुक्त हो , इसके अलावा उन लोगो में इसका खतरा ज्यादा रहता है जो डायबिटीज के मरीज है या फिर लम्बे समय तक स्टेरॉयड ले रहे है।
महिलाओं को भी ज्यादा  खतरा है 
व्हाइट फंगस का खतरा महिलाओं को भी ज्यादा होता है और उनमे ये ल्यूकोरिया यानि जननांग से सफ़ेद स्त्राव के रूप में दिखता है।  कैंसर के मरीजों को  भी इस संक्रमण का ज्यादा डर रहता है।
कोरोना संक्रमण जैसे लक्षण दिखने पर  अगर मरीज RTPCR करवाता है और जाँच नतीजा निगेटिव आता है। तो विशेषज्ञ उसे कोरोना के लिए HRCT करवाने की सलाह  देते है।  इसमें लंग्स गोले की तरह दिखते है जो की कोरोना से अलग है।  तब मरीजों में बलगम कल्चर की जाँच करवाई जाती है , जिसमे इसकी पुष्टि हो जाती है।
व्हाइट फंगस कैसे शरीर में करता है प्रवेश 
ये संक्रमण खून के माध्यम से शरीर के हर अंग को  प्रभावित करता है।  ये बीमारी म्यूकोरमाइसाइट्स नामक फफूंद से होती है जो नाक से माध्यम से बाकि अंग तक पहुंच जाती है।  ये फंगस हवा में होता है जो सांस के जरिए नाक में जाता है।  इसके अलावा शरीर के कटे हुए अंग के सम्पर्क में अगर ये फंगस आता है तो ये संक्रमण  हो  जाता है।
व्हाइट फंगस के लक्षण –
  • व्हाइट फंगस के  लक्षणों में सिर में तेज दर्द , नाक बंद होना या नाक में  पपड़ी सी जमना।
  • उल्टियां , आँखे लाल होने के साथ सूजन आती है।
  • अगर ज्वाइंट पर इसका असर होता है तो जोड़ो में तेज दर्द होता है।
  • ब्रेन पर इसका असर  होता है तो व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता कम होने लगती है।
  • बोलने की समस्या होती है।
  • इसके अलावा शरीर में छोटे -छोटे फोड़े जो सामान्यतौर पर दर्द रहित रहते है।
  • ये संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति को नहीं होता , ये तभी होता है जब वो सीधे फंगस के सम्पर्क में आता है।
  • साँस फूलना।
  • लगातार खांसी।
व्हाइट फंगस का इलाज व् बचाव –
व्हाइट फंगस के इलाज के लिए एंटीफंगल मेडिसिन का इस्तेमाल कर सकते है।  हालाँकि दवाएं तभी ज्यादा असरदार होती है , जब बीमारी शुरूआती अवस्था में पकड़ में आ जाएँ।  देर से पता चलने पर मरीज की हालात गंभीर हो सकती है।  व्हाइट फंगस का एकदम पुख्ता बचाव नहीं किया जा सकता , लेकिन फिर भी कुछ हद तक सावधानी बरती जा सकती है जैसे –
  • धूल – मिटटी या गंदगी वाली जगह पर न जाना।
  • मास्क का प्रयोग करे।
  • इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले खाद्य पदार्थ खाना।
  • योगा व एक्सरसाइज करना।
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