Circulatory system (परिसंचरण तंत्र )

रुधिर तथा उसके कार्य blood and work

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blood

 

वह विशेष विशेष द्रव्य जो ऑक्सीजन को कोशिकाओं तक लाये व उनके उत्सर्जी पदार्थो को उत्सर्जी अंगो तक ले जाये , रुधिर कहलाता है।  
एक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में शरीर के वजन की 7% मात्रा रक्त की होती है।  

  • रुधिर दो भागो में बटा होता है।  
प्लाज़्मा , रुधिराणु,लाल रुधिर कणिका (RBC), श्वेत रुधिर कणिका (WBC), बिम्बाणु (platlats),रुधिर के कार्य (blood and work)
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 1 . प्लाज़्मा 
        रुधिर का लगभग 57 प्रतिशत भाग प्लाज़्मा होता है।  स्वस्थ मनुष्य के शरीर में लगभग 3.5  लीटर प्लाज़्मा पाया जाता है।  प्लाज़्मा का pH 7.35 -7. 45  ( हल्का क्षारीय ) तक होता है।  प्लाज़्मा में मुख्य रूप से सोडियम धातु आयनिक रूप में पायी जाती है।  

2. रुधिराणु

रुधिर का लगभग 43 प्रतिशत भाग रुधिराणु का बना होता है।  इन्हे हिमेटोक्रिट कहते है।  रुधिराणु मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते है।  

(1 ) लाल रुधिर कणिका (RBC) 

– ये विभिन्न जाति के जन्तुओ में विभिन्नता लिए हुए होती है व स्तन धरियो में गोल , उभयावतल व तस्तरीनुमा होती है।  
– आरबीसी का जीवन कॉल 120 दिन का होता है।  
– आरबीसी की कमी से एनीमिया रोग हो जाता है।  
हीमोग्लोबिन – लाल रक्त कणिकाओं में उपस्थित लोह पदार्थ, हीमोग्लोबिन की अधिकता  के कारण ही रक्त का रंग लाल होता है।  

(2) श्वेत  रुधिर कणिका (WBC)

– यह हीमोग्लोबिन रहित रुधिर कणिकाएं है।  इन्हे leucocytes भी कहा जाता है।  एक मिली क्यूब में इनकी संख्या लगभग 7000 होती है।  इनका जीवनकाल अधिक से अधिक एक सप्ताह  होता है तथा मुख्य कार्य रोगो से सुरक्षा करना है।  

(3) बिम्बाणु (platlats)

– यह मात्र स्तन धारियो के रुधिर में पाए जाते है।  इनका प्रमुख कार्य रुधिर का थक्का बनाने में सहायता प्रदान करना है।  इन्हे थिम्फोसाइट्स भी कहा जाता है।  
– इनकी संख्या 2 से 4 लाख प्रति घन मिमी ( बिम्बाणु  की संख्या लाल रुधिर कणिकाओं से कम से कम तथा श्वेत रुधिर कणिकाओं से अधिक है।  ) होती है।  

  • रुधिर के कार्य

रुधिर का कार्य ऑक्सीजन का परिवहन , एंजाइम , हार्मोन्स , एंटीबाडीज आदि पदार्थो का परिवहन करना , शरीर के ताप को नियंत्रित रखना , रोगो से रक्षा करना, घावों को भरना, शरीर की आंतरिक जैविक क्रियाओ को स्थिर बनाये रखना आदि है।  

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