हमारे आसपास ऐसे कई पौधे है जो देखने  में काफी खूबसूरत लगते है।  कई ऐसे पौधे जो घर के लिए साज – सज्जा के साथ साथ औषधीय उपयोग के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है।  इनमे कुछ खास पोषक तत्व कई बीमारियां को दूर करने में मदद कर सकते है। ऐसा एक ही पौधा है नागफनी।  नागफनी शारीरिक समस्याओ से निपटने में मदद कर सकता है ,लेकिन पूर्ण इलाज साबित नहीं हो सकती।

 

नागफनी (कैक्टस )
नागफनी (कैक्टस )

नागफनी क्या है ?

नागफनी कैकटीसिया परिवार का एक झाड़ीनुमा पौधा है।  इसे अंग्रेजी में कैक्टस के नाम से जाना जाता है।  यह ऐसे स्थानों पर पाया जाता है , जहां अमूमन पानी की कमी होती है।  यही कारण है की मुख्य रूप से अमेरिका , दक्षिण अमेरिका और वेस्ट इंडीज में पाया जाता है।  भारत में यह कुछ मरुस्थलीय इलाकों में पाया जाता है।

इसके कई प्रकार की प्रजातियां है।  इनमे से कुछ प्रजातियां ऐसी है , जिनकी खेती की जाती है , ताकि ओषधि और सजावट दोनों के लिए इसे इस्तेमाल में लाया जा सके।  इसका तना मांसल और पत्ते के आकार का होता है।  साथ ही पर कांटे भी मौजूद होते है।  यह कम पानी का इस्तेमाल कर सदा हरा -भरा बना रहता है। यह बहुत धीरे -धीरे बढ़ते है और काफी समय तक आसानी से जीवित रहते है।  नागफनी में कैल्शियम , पौटेशियम , मैगनीशीयम आदि शामिल होते है।  नागफनी में कैलोरी में कम , वसा से भरपूर कोलेस्ट्रॉल में कम होने के साथ कई तरह के पोषक तत्वों का स्त्रोत है।  इसके फलो को सुखाकर और पीसकर मवेशियों को भी खिलाया जाता है।  नागफनी के फल गोलाकार अथवा नाशपाती के आकार के होते है।  यह आधे पके होने की अवस्था में बहुधा मांसल और पुरे पके होने पर गहरे लाल रंग के होते है। नागफनी के पौधे में फूल और फल अप्रेल -सितम्बर से नवम्बर – दिसम्बर तक होता है।

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नागफनी के फायदे 

1  पाचन प्रक्रिया  में सुधार –

नागफनी केक्टस का एक रूप है।  इसलिए ये बहुत रेशेदार होते है और इसमें बहुत अधिक आहार फाइबर होता है। पाचन प्रक्रिया में फाइबर बहुत आवश्यक होता है क्योंकि यह आँतो के कार्यो के लिए बल्क जोड़ता है।  यह दस्त और कब्ज के लक्षणों को कम करता है।  इसके आलावा शरीर में अतिरिक्त फाइबर सक्रिय रूप से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम कर सकते है जिससे दिल के स्वास्थ्य की रक्षा भी हो सकती है।

2  वजन घटाने में सहायक –

नागफनी ,में कई ऐसे घटक होते है जो वजन घटाने में सहायता करते है।  यह भूख को बढ़ाने वाला हार्मोन है।  इसके आलावा यह संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल बहुत कम है।  यह बिना वजन बढ़ाए उच्च स्तर पर काम करता है।  इसमें मौजूद विटामिन बी 6 , थियामिन और रिबोफ़्लीविन की उपस्थिति भी चपापचयी कार्य को जल्दी से करती है।

3  सूजन कम करने में –

नागफनी की पत्तियों से निकाले जाने वाले रस सूजन को कम करने वाले प्रभाव देखे गए है जिनमे गठिया , जोड़ो के दर्द और मांसपेशियों के तनाव से जुड़ा लक्षण भी शामिल है।

4   आँखों के लाभकारी है नागफनी –

नागफनी के तने के गूदे को पीसकर आँखों के बाहर चारो तरफ लगाने से आँखों के अनेक रोग ठीक होते है।  आँखों में लाली की समस्या हो तो नागफनी के तने से कांटे साफ कर दे और बिच में से फाड़ ले।  इसके गूदे वाले भाग को कपड़े में लपेट कर आँखों पर रखने से लाभ होता है।

5  कैंसर से करे बचाव नागफनी –

कैंसर से बचाव के लिए नागफनी का इस्तेमाल कर सकते है।  दरअसल , एरिजोना केक्टस पर किये गए शोध में पाया गया की इसमें एंटी कैंसर गुण मौजूद होता है जो कैंसर सेल्स को न केवल बढ़ने से रोकता  रोकता है , बल्कि उन्हें खत्म करने में मददगार साबित हो सकता है।  फ़िलहाल इस संबंध में अभी और शोध किये जाने की आवश्यकता है।

6 नागफनी के औषधीय लाभ –

नागफनी स्वाद में कड़वी , पचने पर मधुर और प्रकृति में बहुत गर्म होती है।  नागफनी कफ को निकालती है , खून को साफ करती है और खून का बहना रोकती है।  इसके फूल कसैले होते है।  इनका तना तासीर में ठंडा और स्वाद में कसैला होता है।  तना हल्का विरेचक , भूख बढ़ाने वाला और बुखार तथा विष को नष्ट करने वाला होता है।

7  प्रोस्टेट की समस्या दूर करें –

आयु बढ़ने से प्रोस्टेट ग्लेन्डो यानि पौरुष ग्रंथि का बढ़ना , पुरुषों में होने वाली एक आम परेशानी है पेशाब करने में समस्या ही प्रोस्टेट कैंसर के प्रमुख लक्षण है।  प्रोस्टेट ग्रंथि को बढ़ने के कारण पेशाब करने में परेशानी होती है।  रात में बार -बार पेशाब जाना , अचानक से पेशाब निकल आना , पेशाब रोकने में समस्या आदि लक्षण प्रोस्टेट कैंसर में दिखाई पड़ते है।  नागफनी के फूलों के चूर्ण का सेवन करने से प्रोस्टेट ग्लैंड के बढ़ जाने की समस्या दूर होती है।

 

8 चर्म रोग तथा घाव ठीक करे नागफनी –

नागफनी में एंटीसेप्टिक गुण होते है।  इसलिए यह अनेक चर्म रोगों में काम आता है।  नागफनी घावों को शीघ्र भर देता है , उनमे संक्रमण नहीं पनपने देता है और कीड़ो तथा पस यानि पीव को नष्ट करता है। नागफनी के तने के गूदे को पीसकर घाव पर लगाने से घाव शीघ्र भर जाता है।  यदि फोड़े कच्चे हो और पक न रहे हो तो नागफनी के पत्तों को पीसकर गुनगुना गर्म करके फोड़ों पर लेप कर दे।  फोड़े शीघ्र पक कर फुट जाते है।

9  अनिद्रा की समस्या को करे दूर नागफनी –

नागफनी का उपयोग अनिद्रा की समस्या को दूर करने के लिए भी किया जा सकता है।  नागफनी में कुछ ऐसे तत्व पाए जाते है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संतुलित करने का काम कर सकते है।  साथ ही ये तत्व खून के दौरे को नियंत्रित कर सकते है और नींद को बढ़ावा देकर अनिद्रा की समस्या से राहत दिलाने में मदद कर सकते है।  यही कारण है की इसका सेवन अनिद्रा की समस्या को दूर करने के लिए लाभकारी माना जा सकता है।

10  मजबूत हड्डियों के लिए नागफनी लाभकारी –

नागफनी का एक विशेष प्रकार ओपयूंटिया , जिसे प्रिक्ली पियर्स के नाम से भी जाना जाता है जिसमें कैल्शियम अच्छी मात्रा में पाई जाती है , जो क्षतिग्रस्त होने के बाद मजबूत हड्डियों के निर्माण और हड्डियों की रिपेयर का एक अनिवार्य हिस्सा है।

नागफनी के नुकसान –

  • रक्त शर्करा के स्तर को विनियमित करने और प्रभावित करने की क्षमता के कारण , नेपोलेस कभी -कभी लोगो को हाइपोग्लाइमिक बना सकता है।
  • फाइबर की मौजूदगी के कारण इसका अधिक सेवन करने से पेट सबंधी समस्याएँ ( जैसे – गैस , कब्ज और पेट में दर्द ) हो सकती है।
  • वही इसमें मौजूद कैल्शियम किडनी स्टोन और ह्रदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।
  • कुछ खास लोगो में इसके सेवन से एलर्जी होने से शिकायत भी पाई गई है।
  • ऑपरेशन से पहले भी अत्यधिक उपयोग नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इससे ग्लूकोज और रक्त पोषक तत्वों को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
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नागफनी का उपयोग –

  • नागफनी को खाने के लिए आप छीलकर इसके अंदर के सफ़ेद भाग को सुबह -शाम सलाद या सब्जी के रूप में इस्तेमाल कर सकते है।
  • त्वचा संबंधी समस्याओं के आप इसके बीच के गूदे को निकाल प्रभावित स्थान पर दिन में दो बार लगा सकते है।

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