महिलाओं में स्तन कैंसर के कारण , बचाव के उपाय और कैंसर का इलाज

स्तन कैंसर 

 

शरीर के किसी अंग में होने वाली कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि कैंसर का प्रमुख कारण होती है।  शरीर की आवश्यकता अनुसार यह कोशिकाएं बंट जाती है , लेकिन जब लगातार वृद्धि करती है तो कैंसर का रूप ले लेती है।  ऐसी प्रकार स्तन कोशिकाओं में होने वाली अनियंत्रित वृद्धि , स्तन कैंसर का मुख्य कारण है।  कोशिकाओं में होने वाली लगातार वृद्धि एकत्र होकर गांठ का रूप ले लेती है जिसे कैंसर ट्यूमर कहते है।स्तन कैंसर  का नाम सुनते ही कैंसर पीड़ित और उनके परिवार वाले मरीज के जीने की उम्मीद छोड़ देते है , लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ये धारणा सही नहीं है।  स्तन कैंसर होने पर पहले या दूसरे चरण में ही इसका पता चल जाने से सही समय पर इसका इलाज सम्भव है , लेकिन इस बारे में पता चलना भी आपकी जागरूकता पर निर्भर करता है।  अगर आप स्तन कैंसर के प्रति जागरूक है तो इसके लक्षणों को पहचानकर आप इसका इलाज सही समय पर करवा सकते है।  आइए स्तन कैंसर के बारे में पहले सामान्य कारणों को जानते है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बच्चे नहीं पैदा करना , अधिक उम्र में पहला बच्चा होना , स्तनपान नहीं कराना, वजन में अत्यधिक वृद्धि और अक्सर शराब का सेवन करना तथा खराब व अनिंयत्रित जीवनशैली स्तन कैंसर के प्रमुख कारण है।  इसके अलावा भी आनुवशिंक रूप से भी स्तन कैंसर की बीमारी होना सम्भव है।
इसके अलावा महिलाओं को जागरूक रहने के साथ  ही नियमित तौर पर स्तन कैंसर की जाँच करवाना चाहिए। . महिलाएं अपने ब्रेस्ट का परीक्षण , मैमोग्राफी से करवा सकती है।  इसका उपयोग रोग की पहचान करने और उसका पता लगाने में उपकरण के रूप में किया  है। मेमोग्राफी का लक्ष्य स्तन कैंसर का शुरूआती दौर में ही पता लगाना है।

स्तन कैंसर के लक्षण

स्तन कैंसर से सम्बंधित लक्षण आम है।  इन्ही लक्षण के कारण हर साल 15 मिलियन से अधिक महिलाएं डॉक्टर के पास जाँच के लिए जाती है।  इन लक्षणों में शामिल है –

  • स्तन के आकार में बदलाव महसूस होना।
  • स्तन या बांह के नीचे की ओर टटोलने पर गांठ महसूस होना।
  • स्तन को दबाने पर दर्द होना।
  • कोई तरल या चिपचिपा पदार्थ स्त्रावित होता है।
  • निप्पल के अग्रभाग का मुड़ना एवं रंग में लाल होना।
  • स्तनों में सूजन आ जाना।
  • चूचक के चारों ओर त्वचा गीली महसूस होती है।

 

हालाँकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती , लेकिन इसकी जाँच करवाना बेहद जरुरी है , ताकि कही वो आगे चलकर कैंसर का रूप ना लें।

स्तन कैंसर को रोकने के उपाय

  • एक्सरसाइज और योगा को नियमित करें।
  • नमक का अत्यधिक सेवन न करें।
  • रेड मीट के अधिक सेवन से बचें।
  • अधिक मात्रा में धूम्रपान और नशीले पदार्थो का सेवन न करें।
  • गर्भनिरोधक गोलियों का लगातार सेवन करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श लें।
इसके अलावा कुछ अन्य घरेलू उपाय है जिन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल कर स्तन कैंसर के खतरे से  बच सकते है। 
  1. नियमित रूप से काली चाय का सेवन करना स्तन कैंसर से  आपकी रक्षा करता है।  इसका प्रमुख कारण इसमें पाया जाने वाला एपीगैलो कैटिचीन गैलेट नामक तत्व है , जो ट्यूर की कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को रोकने में मदद करता है।
  2. ग्रीन टी सेवन भी स्तन कैंसर  रक्षा करने में सहायक है।  इसमें पाए जाने वाले एंटी – इन्फ्लेमेटरी गुण स्तन कैंसर को बढ़ने से रोकने में मदद करते है।
  3. चाय को अत्यधिक गर्म करके पीना भी स्तन कैंसर का कारण  सकता है क्योंकि गर्म तापमान कैंसर कोशिकाओं में वृद्धि करते है। ऐसे में हल्की गर्म चाय का ही सेवन करें।
  4. विटामिन डी का सेवन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने में सहायक है।  इसके लिए दूध व दही का सेवन करना फायदेमंद होता है।
  5. विटामिन सी भी आपको स्तन कैंसर से बचाता है। यह आपके प्रतिरक्षी तंत्र को मजबूत करके कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है।
  6. कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकने के लिए गेँहू के ज्वारे भी बेहद कारगर उपाय है , यह न केवल हानिकारक पदार्थो को बाहर निकालने में सहायक है बल्कि आपके प्रतिरक्षी तंत्र को भी मजबूत करते है।
  7. मशरूम , प्याज , लहसुन , अदरक , पपीता , गाजर , संतरा ,और हरी सब्जियां आहार  करें।
  8.  प्रोटीन , फाइबर और फोलेट से भरपूर दालें खाने से भी कैंसर की सम्भावना काफी हद तक  कम होती है।

मासिक धर्म का जल्दी आना भी है स्तन कैंसर का कारण, महिलाओं में बढ़ रही है, आइए जाने बचाव के तरीके–

यह माना जाता है महिलाओं में स्तन कैंसर की आंशका 30 की उम्र से शुरू होती है और 50 से ज्यादा उम्र की महिलाओं में इसकी आंशका बढ़ जाती है।  अभी तक स्तन कैंसर होने की खास वजह तो पता नहीं चली है , लेकिन ऐसे बहुत से कारण है जो इस खतरे को बढ़ा सकते है।

महिलाओं की उम्र पर निर्भर

25 से अधिक उम्र की महिलाओं को महीने में एक बार स्तन कैंसर का स्वत : परीक्षण करना चाहिए
महिलाओं की जैसे -जैसे उम्र बढ़ती जाती है , वैसे – वैसे स्तन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है और सबसे ज्यादा आंशका 50 की उम्र से ज्यादा वाली महिलाओं में देखी गई है।  ऐसी महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सतर्क रहना चाहिए एवं जाँच करवानी चाहिए।

मासिक धर्म का जल्दी आना

जिन लड़कियों का मासिक धर्म काफी कम उम्र में आ जाता है उनमे भी स्तन कैंसर का खतरा ज्यादा होता है।

अनियमित जीवनशैली

यदि कोई महिला अपने खान – पान में ध्यान नहीं देती या किसी  महिला का वजन बढ़ जाता है।  विशेषकर स्तनों में असामान्य गांठविकसित होती है तो उसके प्रति भी सतर्क रहना चाहिए।  कई बार स्तन में कई अन्य कारणों से भी गांठ होती है तो निवारण के लिए इसकी जाँच जरूर करवा लेनी चाहिए।

इन महिलाओं को अधिक खतरा

मोनोपॉज के बाद हार्मोन रिप्लेसमेंट कराने वाली या गर्भनिरोधक गोलियाँ का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है।  इसके साथ ही शिशु को स्तनपान न करवाना भी एक बहुत बड़ा कारण हो सकता है।

इलाज की संभावना

स्तन कैंसर के चार चरण होते है।  अगर पहले स्टेज पर ही इसकी जानकारी हो जाए तो ठीक होने की सम्भावना 80 फीसदी होती है।  वही दूसरे स्टेज में यह सम्भावना 60 फीसदी रह जाती है।  लेकिन तीसरे और चौथे स्टेज में इस कैंसर के इलाज से ठीक  होने की सम्भावना न के बराबर रह जाती है।

3 तरह से इलाज – इस प्रकार है –

1 रेडियोथैरेपी

इस उपचार में हानिकारक कोशिकाओं को नियंत्रित करने और खत्म करने के लिए आयनाइजिंग रेडिएशन का उपयोग किया जाता है।  रेडियोथैरेपी  में पांच सप्ताह का समय लगता है और इस पर लगभग एक लाख रूपये का खर्च आता है।

2 कीमोथैरेपी

कीमोथैरेपी कैंसर उपचार की वह प्रक्रिया है जिसमें रसायनिक तत्वों का प्रयोग किया जाता है।  इसमें कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए एक या अधिक एंटी – कैंसर दवाओं का प्रयोग होता है।  यह शरीर के किसी अन्य हिस्से में फैली कैंसरकारी कोशिकाओं को खत्म करने में भी उपयोगी है।  कीमोथैरेपी 3 -4 महीनो के लिए दी जाती है और इसमें 1 -2 लाख रूपए का खर्च आता है जो सामान्य कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाने के साथ ही कैंसर कोशिकाओं पर हमला करता है।  इस थैरेपी का खर्च 15 लाख रूपए तक आता है।

3  सर्जरी 

इस इलाज में सर्जरी से कैंसरकारी उत्तको को हटाया जाता है और मरीज को पूरी तरह से स्वस्थ होने में 15 दिन लगते है।  इसमें 70 हजार रूपए तक खर्च आता है।

टीका उपलब्ध नहीं 

स्तन कैंसर के लिए अभी तक कोई टीकाकरण उपलब्ध नहीं है।  इसलिए 40 वर्ष की उम्र के बाद मैमोग्राफी और स्वत : स्तन परीक्षण करने की सलाह दी जाती है।

25 से 30 साल  की महिलाएं भी हो रही स्तन कैंसर का शिकार , आइए जाने – इसके लक्षण और इलाज 

बदलती जीवन शैली ने स्तन कैंसर  का खतरा और बढ़ा दिया है।  आम तौर पर स्तन कैंसर 45 से 50 साल की उम्र की महिलाओं को होता था , लेकिन अस्वास्थ्यकर जीवन शैली  के चलते आज यह उम्र घटकर लगभग 25 से 30 साल तक हो गई है। 20 साल की उम्र से हर महिला को हर महीने माहवारी शुरू होने के 5 से 7 दिनों के बीच खुद ब्रेस्ट की जाँच करनी चाहिए।  शीशे के सामने खड़े होकर अपने हाथों को धीरे -धीरे स्तनों पर ऊपर से निचे की तरफ लाये।  अगर कोई गांठ होगी तो महिलाओं  इसका अहसास होगा।  20 से 39 वर्ष की आयु की महिलाये विशेषज्ञ से परीक्षण प्रत्येक तीन वर्ष में और 40 वर्ष की आयु के बाद हर वर्ष कराएं।

क्या है कारण 

 

  • देर से माँ बनना।
  • बच्चे को कम समय तक दूध पिलाना और माहवारी का  उम्र में  ही शुरू होना स्तन कैंसर का कुछ प्रमुख कारण है।

लक्षणों को जाने 

 

  • स्तन की त्वचा पर कोई फोड़ा अल्सर जो ठीक न होता हो।
  • स्तन के अग्रभाग का भीतर की तरफ खींचना , उसका लाल पड़ना।

इलाज  के बारे 

(1 ) हार्मोनल थेरेपी 

कैंसर कोशिकाओं पर कुछ रिसेप्टर्स होते है।  जैसे ‘ ई आर ‘  और ‘पी आर ‘ जिसकी जाँच बॉयोप्सी के दौरान कर लेनी चाहिए।  हार्मोनल थेरेपी इन्ही रिसेप्टर्स  ( जिनके कारण कैंसर फैलता है ) के विरुद्ध काम करती है।

(2 ) टार्गेटेड थैरेपी 

टार्गेटेड थैरेपी कीमोथेरेपी की तरह साइड इफेक्ट नहीं होता।  यह थेरेपी सिर्फ कैंसर के ग्रस्त भाग के समीप वाली स्वस्थ कोशिकाओं या टिश्यूज पर खराब प्रभाव नहीं डालती है।

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