हिपेटाइटिस अर्थात यकृत शोथ यकृत का रोग हैं जिसमें यकृत में सूजन आ जाती हैं। यह क्रिया 5 प्रकार के विषाणुओं के संक्रमण के कारण हो सकती हैं। हिपेटाइटिस B द्वारा संक्रमण  होने पर संक्रमण तीव्र प्रकृति का होता हैं। 

हिपेटाइटिस A 

बच्चों का प्रमुख संक्रामक रोग हैं। यह रोग बच्चों में अत्यधिक साफ -सफाई में अधूरापन होने के कारण, जल, भोजन या अन्य भोज्य सामग्री के उपयोग से फैलता हैं।  वयस्कों में रक्तधान एवं समलैंगिक संबन्धों से फैलता हैं। संक्रमण के उपरान्त कुछ दिनों से लेकर 2 सप्ताह में पीलिया हो जाता हैं।   सिरदर्द, सर्दी का लगना प्रमुख लक्ष्ण हैं। बाद में यह लक्षण नाक में बहना, उल्टी , दस्त, भूख का कम लगना आदि प्रकट होते हैं।  रोगी के मूत्र का रंग गहरा पीला हो जाता हैं।  रोग का परीक्षण रक्त में बिलीरुबिन का मापन कर किया जाता हैं।  साथ ही एल्केलाइन फॉस्फेट क्रिया रोग में तीर्व हो जाती हैं यह 250 इकाई / लीटर से ऊपर हो जाती हैं। 

रोगी को अच्छे स्वच्छ वातावरण में रखना चाहिये एवं उच्च पोषक तत्वों वाला भोजन, ग्लूकोज व फलो का रस दिया जाना चाहिये। चिकित्सक के परामर्श औषधियां दी जाना चाहिये।  इसका टीका उपलब्ध नहीं हैं। 
 

हिपेटाइटिस- B :   

हिपेटाइटिस B मानव जाति का एक महत्वपूर्ण रोग हैं।   इस रोग का उपचार सम्भव हैं।  इसके लिये स्वस्थ सुरक्षित टीका लगाना आवश्यक हैं।  इसका टीका 1982 से उपलब्ध हैं।  इस रोग से 2 खरब लोग पीड़ित हो चुके है जिससे 500 मिलियन में तीर्व संक्रमण के कारण यकृत का सिरोसिस (cirrhosis) हो चुका हैं। मिलियन प्रतिवर्ष  इस रोग के कारण मर जाते हैं। 

 
हिपेटाइटिस B की संरचना
हिपेटाइटिस B की संरचना
WHO  के द्वारा 116  देशों  में प्रतिरक्षीकरण का कार्यक्रम चलाया गया हैं जिसमे सभी बच्चों को इस रोग के टीके लगाये जाते हैं। यह टीका मँहगा हैं। जिससे गरीब राष्ट्र या लोग खर्च उठाने में असर्मथ हैं।  उनके लिए ग्लोबल एलायन्स फॉर वेक्सीन्स एन्ड इम्युनाजेशन (Global Alliane For vaccines and Immunization, GAVI) एवं ग्लोबल फंड फॉर चिल्ड्रन्स वैक्सीन्स (Global Fund for childrens vaccines ) से सहायता उपलब्ध हैं। यह रोग अधिकतर 1 -4  वर्ष की उम्र में बच्चों को हो जाता हैं, इसमें से 30 -50 % बच्चों में यह तीर्व संक्रमण उतपन्न करता हैं। ऐसे लोगों  में 25 % को  कैंसर से मृत्यु का खतरा रहता हैं। 


संक्रमण के कारण (Reasons of  infection) :  

 यह रोगी  के रक्त या दैहिक तरल के सम्पर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति को हो सकता हैं अर्थात AIDS की भाँति फैलता हैं किन्तु AIDS की अपेक्षा 50 -100%   अधिक संक्रमण क्षमता  रखता हैं।  संक्रमण होने के निमन कारण हो सकते हैं –

(1 ) रोगी माता से शिशु को गर्भ के दौरान। 
(2 ) संक्रमित बच्चे से स्वस्थ शिशु को। 
(3 ) असुरक्षित सुई द्वारा। 
(4 ) समलैंगिक संबंधो के द्वारा।
(5 )असुरक्षित लैंगिक संबंधो के द्वारा।

परिचय एवं इतिहास –

रोगजनक (Causative agent ): मैक्कैलम (Mac Callum ) ने 1947 में सर्वप्रथम हिपेटाइटिस -A व हिपेटाइटिस -B नामो  उपयोग इस महामारी हेतु किया जिसे सीरम हिपेटाइटिस भी कहते हैं।  विषानिक A हिपेटाइटिस गुदीय मुख पथ द्वारा जबकि B हिपेटाइटिस प्राथमिक तौर पर जन्म के समय ही जनकों के द्वारा शिशु में होता हैं। 
1963 में ब्लूमबर्ग (Blumberg) ने एक ऑस्ट्रेलियन रोगी के रक्त में एक विशिष्ट प्रोटीन खोजा जिसे AU प्रतिजन नाम दिया गया। यहाँ AU से आशय ऑस्ट्रेलिया से हैं , प्रिंस ओकोचि एवं मुरेकमी (Prince Okachi and Mutrakami ) ने पाया की ऐसी प्रकृति का प्रोटीन B हिपेटाइटिस  के रोगियो के रक्त में पाया जाता हैं। 
राबिन्सन ने इस विषाणु के जीनोम की खोज की।  इनका जीनोम अत्यन्त सघन प्रकार का होता हैं।  इसके विरिआन में प्राथमिक डी. एन. ए. होता हैं।  इसे हिपेडनेवरीदे कुल में रखा गया हैं। इस कुल में अन्य उष्ण रक्त वाले जीवों (बतख, गिलहरी, हंस एवं वानर) के HDV भी आते हैं। 
 
यह विषाणु हिपेटाइटिस B विषाणु कहलाता हैं।  इसका परिपाक काल 30 -180 दिन का होता हैं। 
 

                                     हिपेटाइटिस  के लक्षण 

daaz
y{k.k
ghisVk;Vh
l A
ghisVk;Vh
l B
ghisVk;Vh
टिस C
ghisVk;
टिस  D
ghisVk;Vhl
l E
1
thukse
RNA 
DNA
RNA
RNA
RNA
2
thok.kq
पिकोरनावि रिडी 
हिपेदनावी 
फ्लेविवि रिडी 
डेल्टा वायरस 
केलियेविरिडी 
3
,stsUV
हिपेटाइटिस A
वायरस (HAV)
HBV
HCV
HDV
HEV
4
vk;q
izHkko

बालक 
किसी भी आयु में 
वयस्क 
किसी भी आयु में 
बालक /
                        वयस्क 
5
इन्क्यूबेसन 
2 -4 सप्ताह 
6-26 सप्ताह 
1 -8 सप्ताह 
अनिश्चित 
2-6 सप्ताह 
6
रक्त में एन्टीजन
HAV
HB2Ag
HCV
HDAg
HEV
7
रक्त में  एंटीबॉडी 

एंटी  HAV

एंटी  HB

एंटी  HBe

एंटी  HBc

एंटी  HCV

एंटी  HDV

एंटी  HEV

 

 

 
 
हिपेटाइटिस B वायरस इंफेक्शन
     हिपेटाइटिस B  वायरस इंफेक्शन
 

उपचार एवं रोकथाम :– 

इस रोग का कोई उपचार नहीं हैं।  हिपेटाइटिस -B हेतु प्रतिरक्षी सीरम ग्लोबुलीन जो एंटी HBs से तैयार किया गया हैं। 

इसका शुद्ध HBs एंटीजन से प्राप्त किया जाता हैं।  यह एंटीजन  हिपेटाइटिस B रोगी के वाहक के प्लाज्मा से प्राप्त किया जाता हैं। रोगी को उपचार हेतु इंटरफेरॉन दिया जाता हैं।  चार माह में रोगी अधिकतर ठीक हो जाते हैं।  
रोग से बचने हेतु निमन उपयोग  किये जा सकते हैं –
 (1 ) लैंगिक संबन्ध स्थापित करते समय कंडोम का उपयोग करें। 
(2 ) पूर्व में कम में ली गयी सुइयों का उपयोग न करें। 
(3 यदि आप  रक्त को छूते हो तो दस्ताने का उपयोग करें। 
(4 ) यदि देह को भेदना या बंधन कराना हो तो निजर्मीत औजारो का उपयोग करे।

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