खटमल (BEDBUG ) या साईमेक्स (CIMEX )  के वर्गीकरण ,संघ , वर्ग व इनके लक्षण और बीमारी व बचाव। 

 

खटमल (वैज्ञानिक नाम : CINMEX LECTULARIUS ) परजीवी कीट है जो खून पर जिन्दा  रहता है।  इसकी आम प्रजाति  मनुष्य के रक्त पर भोजन करती है।  यह घर में विशेषकर बिस्तर पर पाए जाते है।

 

 

इस लेख की विषय सूची इस प्रकार है –

*  वर्गीकरण – संघ। 

*  वर्ग व उपवर्ग। 

* गण व वंश। 

*  खटमल क्या है ?

*  खटमल के लक्षण। 

*  खटमल से होने वाली बीमारियां। 

*  खटमल से होने वाले रोग से बचाव। 

 

वर्गीकरण 

संघ (Phylum ) – आर्थोपोडा (Arthropoda ) –

इनमे संधियुक्त उपांग पाये जाते है।  क्यूटिकल का बना बाह्म कंकाल पाया जाता है।  इनका परिसंचरण खुले प्रकार का होता है।

वर्ग (CLASS – इन्सेकटा (Insecta ) –

इनका सिर , वक्ष व उदर में विभक्त होता है।  वक्ष में तीन जोड़ी टांगे पायी जाती है।  एक जोड़ी शृंगिकाये पायी जाती है।  और इनमे पंख भी पाए जाते है।

 

उपवर्ग (Sub Class ) – टेरिगोटा (Pterygota )-

गण (Order ) – हेमिप्टेरा (Hemiptera )-

वक्ष में दो जोड़ी अर्द्धविकसित पंख पाये जाते है।

वंश (Genus ) : साईमेक्स (Cimex ) या खटमल (Bedbug )

 

खटमल क्या है ?

खटमल एक कीड़ा होता है जो अक्सर बेड, सोफा , गद्दे में छिपा होता है।  ये हमारी त्वचा को काटते है और खून पीते है।  वयस्क खटमल आकार में भूरे रंग के चपटे और अण्डाकार के होते है।  वही छोटे खटमल (Nymphs ) हल्के रंग के व छोटे आकर के होते है।  खटमल हर पांच से दस दिनों में भोजन के लिए बाहर आते है।  इतना ही नहीं कई लोगो को यह जानकर हैरानी हो सकती है की ये एक साल तक बिना खाएं भी जीवित रह सकते है। खटमल कूद या उड़ नहीं सकते।  ये इंसानो के अलावा पशुओं को भी काटते है।  ये कीड़े सिर्फ सोते समय ही काटते है।  एक मादा खटमल अपने पुरे जीवन काल में लगभग 500 अंडे दे सकती है।  वही खटमल के जीवित रहने की अवधि तापमान पर निर्भर है।  10 से 20 डिग्री ठंडे तापमान पर ये खटमल 300 से 400 दिनों तक जिन्दा रह सकते है।

 

खटमल के लक्षण –

  • खटमल रात्रिचर होते है अत : सामान्यतया रात्रि में छिपने के स्थानों से बाहर निकलते है।
  • इनका शरीर अण्डाकार , पृष्ठ  प्रतिपृष्ठ की तरफ चपटा व रक्ताभ भूरे रंग का होता है।
  • शरीर , सिर वक्ष व उदर में विभेदित होता है।
  • इनका सिर छोटा व चौड़ा होता है। व एक जोड़ी संयुक्त नेत्र पाये जाते है।
  • इनके मुखांग भेदकर चूसने योग्य के होते है।  त्वचा को भेदने के लिए सिर की सीध में नुकली शुण्डिका  पायी जाती है।  ये त्वचा को भेदकर रक्त चूसते है।
  • इनका उदर बड़ा होता है।  नर खटमल का उदर मादा की अपेक्षा अधिक नुकीला होता है।
  • वक्ष पर तीन जोड़ी टाँगे व अवशेषी गद्दियों के रूप में पंख पाए जाते है।
  • वयस्क मादा प्रतिदिन लगभग 200 अंडे देती है।  अंडे फर्नीचर या दीवारों की दरारों में दिए जाते है।
  • इनके अंडे श्वेत , बेलनाकार व ऑपरकुलम युक्त होते है।
  • अण्डो में 6 से 10 दिन में अर्भक बाहर निकल जाते है।
  • इनमे हेमिमेटाबोलस प्रकार का कायान्तरण पाया जाता है।
  • खटमल होने का मुख्य लक्षण यह है की सोकर उठने पर शरीर पर लाल चकत्ते नजर आ सकते है।
  • खटमल गंदगी में पनपते है और यदि बहुत दिनों तक बिस्तर को धुप नहीं दिखाया जाए या सीलन हो जाए तो ये पनप जाते है।
खटमल से होने वाली बीमारियां 
  • एलर्जिक रिएक्शन – खटमल के काटने पर होने वाली प्रतिक्रिया हर व्यक्ति में अलग -अलग होती है।  खटमल के काटने पर आपकी त्वचा में हल्की जलन महसूस हो सकती है।  रेडनेस और फोड़े होना भी इसके लक्षण है।  कभी -कभी गंभीर एलर्जिक रिएक्शन भी हो सकते है।
  • खुजली –  खटमल के काटने पर आपको खुजली महसूस होती है।  खटमल आपकी त्वचा के एक ही हिस्से में एक से अधिक बार काटते है इससे आपको कुछ दिनों के बाद भी प्रभावित हिस्से में तेज खुजली हो सकती है।
  • लालिमा और फफोला होना – खटमल के काटने के बाद त्वचा पर लालिमा और फफोला हो जाता है यह फफोला कुछ दिनों बाद ठीक  हो जाता है लेकिन इसमें खुजली बनी रह सकती है।
  • अन्य संक्रमण – हालाँकि खटमल के काटने से किसी भी तरह का कोई इंफेक्शन नहीं होता है , लेकिन इसके काटने के बाद खुजली वाली जगह पर घाव हो सकता है।  यदि घाव का समय रहते सही इलाज न किया जाये तो खुले घाव में संक्रमण होने की सम्भावना अधिक होती है।
  • अनिद्रा – कई बार खटमल के काटने से व्यक्ति भयभीत हो जाता है।  बिस्तर पर खटमल दिखने से व्यक्ति तनाव करने लगता है और इसके कारण वह  सही तरह से नींद नहीं ले पाता है।  इससे आपकी कार्यक्षमता पर प्रभाव नहीं पड़ता है , लेकिन आपकी चिंता बढ़ने लगती है।
  • चगास रोग – कई तरह के अध्ययन और लैब  टेस्ट के बाद यह सिद्ध हुआ है की खटमल के काटने से चगास रोग  होता है।  हालंकि अब तक खटमल से इस रोग के फैलने का कोई मामला नहीं मिला है , लेकिन फिर भी इसके होने की आंशका हमेशा रहती है।  खटमल की आंतो में 40 से ज्यादा रोगाणु मौजूद होते है , इन रोगाणुओं के आपके खुले घाव के सम्पर्क में आने की सम्भावना अधिक होती है , जिससे आप कभी भी रोगो की चपेट में आ सकते है।
  • एनाफ्लैटीक शॉक – जिन लोगों की रोग  प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है या उनको पहले से किसी प्रकार की समस्या होती है जैसे – एलर्जी या अस्थमा , तो ऐसे व्यक्तियों को एनाफ्लैटीक शॉक हो सकता है।  इस तरह के लोगों को खटमल के काटने के बाद जल्द ही इलाज कराना चाहिए।
खटमल से होने वाले रोग से बचाव –
  • अपने बिस्तर , चादर , पर्दे और कपड़ो को गर्म पानी में  धोएं और उनको तेज धुप में ही सुखाएं। इसके अलावा जूते और पालतू  जानवर रखने की जगह को भी अच्छी तरह से साफ करे।
  • ब्रश की मदद से गद्दे को अच्छी तरह से साफ करें ताकि खटमल के अंडे गद्दे से हट जाएं।  इसके बाद गद्दे को वैक्यूम करना चाहिए।
  • घर की दीवारों पर होने वाली दरारों में खटमल आसानी से छुप जाते है।  ऐसे में इन दरारों को भरकर खटमल को घर से दूर कर सकते है।
  • पुदीना खटमल के लिए जहर होता है , इसकी गंध से वह दूर भागते है।  अपने और घर के बच्चो के बिस्तर के नीचे कुछ पुदीने की पत्ती तोड़कर रख दे।  इससे हमेशा के लिए खटमल से मुक्ति मिलेगी।
  • नीम का तेल एक महत्वपूर्ण औषधीय तेल है।  इसका उपयोग कीड़े -मकोड़े को मारने में किया जाता है।  नीम का तेल खटमल वाली जगह पर लगाएं , जल्दी ही सभी खटमल मर जायेंगे।
  • ट्री ट्री तेल का इस्तेमाल करने से घर में मौजूद सारे खटमल खत्म हो जाते है।
  • लॉन्ग का तेल दांतो का दर्द  मिटाता  है और खटमल की परेशानी से भी मुक्ति दिलाता है।  गुनगुने पानी में लौंग का तेल मिलाकर स्प्रे करने से खटमल खत्म हो जाते है।

 

 

 

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