कोलाइटिस : लक्षण , समस्या और समाधान
 
 
 कोलाइटिस
कोलाइटिस 

कोलाइटिस क्या है 

हमारे देश में सामान्यत : कोलाइटिस को लोग अलग -अलग रूप में जानते है।  कुछ लोग पेट में होने वाले तेज दर्द को कोलाइटिस कहते है , तो कुछ लोग दस्त लगने की समस्या को कोलाइटिस मानते है।  जबकि वास्तव में यह बीमारी आंत से सम्बंधित है। बड़ी आंत में सूजन आना , लाल होना या छाले हो जाना कोलाइटिस है। कोलाइटिस दो प्रकार के है  – (1 ) अल्सरेटिव कोलाइटिस और (2 ) क्रोन कोलाइटिस।  यह दोनों कोलाइटिस इम्युनिटी सबंधी समस्या के लिए जिम्मेदार है। कोलाइटिस से पीड़ित व्यक्ति  के लिए समय के साथ बड़ी आंत की अस्तर की सतह पर सेल्स डेड हो जाती है और धीमी गति से चलती है , जिससे अल्सर विकसित होता है।  जिससे मवाद , श्लेष्मा और रक्तस्त्राव होता है।  इस रोग में आंतो में घाव हो जाते है इन घावों से रक्तस्त्राव होता है। यह ज्यादातर बच्चो और बुजुर्गो को होता है।  कोलाइटिस में एंटीबायटिक के अलावा एंटी पैरासाइट दवाइयों का प्रयोग किया जाता है।

कोलाइटिस के लक्षण क्या है 

इससे संबंधित लक्षण लोगों में एक जैसे होते है।  यह लक्षण सामान्यत : एक से दो सप्ताह तक या फिर कई महीनो या सालों पुराने भी हो सकते है।  इन लक्षणों के कारण बच्चे का विकास भी प्रभावित हो सकता है।

इस बीमारी के कुछ लक्षण इस प्रकार है –

 

  • दस्त लगना –  इस समस्या में रोगी को बार -बार शौच के लिए जाना पड़ सकता है।  आम दस्त के अलावा शौच  में खून आना भी कोलाइटिस के लक्षणों में शामिल है।
  • बुखार –  इस समस्या में आपको अचानक तेज गर्मी का अहसास हो सकता है  और  हो तेज बुखार होना भी कोलाइटिस का सामान्य लक्षण है।
  • पेट में दर्द और मरोड़ का एहसास।
  • मलाशय में दर्द।
  • तुरंत मलोतसगर करने की इच्छा।
  • वजन का घटना , थकावट होना।
  • मुँह में छाले होना।
  • बच्चों के बढ़ने में दिक्क्त आना।
समस्या 
कोलाइटिस पेट की एक आम बीमारी है , इसमें बड़ी आंत में सूजन , पेट में मरोड़ के साथ तेज दर्द होना आदि समस्या होती है।  कोलाइटिस होने का एक आम कारण दूषित पानी , दूषित भोजन और अस्वच्छता से होने वाला इंफेक्शन है।  ये इंफेक्शन कई वजहों से हो सकते है , जैसे बच्चों में बैक्टीरिया , पैरासाइट जैसे अमीबासियासिस और वायरस के कारण।  इसे इंफेक्टिव कोलाइटिस कहते है।  अगर पानी शरीर में मल के साथ आंव या ब्लड के रूप में बाहर निकलने लगता है तो इसे अल्सरेटिव कोलाइटिस कहते है।  पेट में दर्द , उलटी होना , बुखार आना स क्रोन कोलाइटिस हो सकता है। पुरुषो और महिलाओं दोनों में यह समस्या समान होती है।  प्रेगनेंसी प्लान  करते समय डॉक्टर से अवश्य इसके बारे में परामर्श लेना चाहिए। अल्सरेटिव कोलाइटिस की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है।
कोलाइटिस का उपचार 
  • जब भी दस्त की समस्या हो तो उसका जल्दी इलाज कराना चाहिए।
  • कई बार कोई विशेष खाने की चीज से एलर्जी भी दस्त का कारण बन सकती है।  ऐसे में खाने की उन चीजों को बंद कर सादा पानी और ओआरएस का एक -दो दिन तक सेवन करना चाहिए।
  • तीन दिन के बाद भी कमजोरी या मल के साथ पस या रक्त निकल रहा हो , पेट में तेज दर्द।  बुखार हो तो किसी फिजिशयन से कंसल्ट करना चाहिए।  वह मल की जाँच कर स्थिति के अनुरूप जाँच और इलाज करते है।
  • कोलाइटिस की समस्या का इलाज आमतौर पर ड्रग थेरेपी द्वारा या सर्जरी द्वारा किया जाता है।
  • सर्जिकल उपचार में रोगी के पुरे कोलन और मलाशय (प्रोक्टोकॉलक्टोमी ) को हटा दिया जाता है।  इस सर्जिकल विधि के एक अन्य प्रक्रिया होती है जिसे इलेओएनल अनास्टोमोसिस के रूप में जाना जाता है जहां सर्जन रोगी की छोटी आंत के अंत से एक थैली का निर्माण करता है और इसे गुदा से जोड़ता है यह थैली मलाशय के समान कार्य  करती है और रोगी के मल को इकट्ठा  करती है और उन्हें सामान्य रूप से बाहर निकालने में मदद करती है। यह पुरी प्रक्रिया डॉक्टर शल्य चिकित्सा द्वारा उपचार के लिए करते है।
ठीक होने में कितना  समय लगता है 
कोलाइटिस के मरीज को इस समस्या से उबरने में लगने वाला समय आमतौर पर स्थिति की गंभीरता और रोगी की निर्धारित दवाओं के प्रति शारीरिक प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।  आमतौर पर हल्के कोलाइटिस के मामलो में बच्चों के ठीक  होने 3 से 4 दिन और वयस्कों के लिए लगभग एक सप्ताह का समय लग सकता है।  हालाँकि , गंभीर कोलाइटिस से पीड़ित रोगियों को इस स्थिति से उबरने में 3 से 4 सप्ताह लग सकते है।
सावधानियाँ 
हालाँकि इस बीमारी से बचाव के लिए अब तक कोई मापदंड तय नहीं हुए है।  लेकिन बीमारी की नियंत्रित करने के लिए अवश्य कुछ प्रयास किए  जा सकते है
  1. तनाव नियंत्रित करना , है फाइबर डाइट लेना , नियमित चेकउप कराना फायदेमंद है।  योगा और मेडिटेशन करने की सलाह भी विशेषज्ञ देते है।
  2. खाने में हाई फाइबर वाले खाद्य पदार्थों जैसे साबुत गेहूं , सब्जियां , बीज वाली सब्जियां सेमि , मटर का सेवन करना फायदेमंद है।
  3. नेचुरल एंटी -इंफ्लेमेटरी जैसे हल्दी और अदरक को नियमित खाने से आंतो की सूजन कम होती है।  काली मिर्च  करने से आंतो की अवशोषण प्रक्रिया भी तेज होती है।
  4. इस बीमारी में पानी ज्यादा पीना सबसे अच्छा होता है , यह दस्त के समय भी मदद करता है।
कोलाइटिस से बचाव के घरेलु उपाय 
कोलाइटिस एक संक्रमणकारी बीमारी है , इससे बचने के लिए साफ – सफाई पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। अगर कोलाइटिस का निदान पहले  हो चूका है तो चिकित्सक से सलाह लेकर इसका उपचार कर सकते है।  इसके साथ ही कुछ घरेलू नुस्खों भी इस्तेमाल कर सकते है।
  • आलू का जूस – कोलाइटिस से राहत पाने के लिए आलू को फायेदमंद माना जाता है।  आलू में मौजूद एल्कलाइन , अल्सरेटिव कोलाइटिस से लड़ने में बहुत असरदार होते है।  इसमें स्टार्च और नेचुरल फाइबर की मात्रा काफी ज्यादा होती है जो आंतो को स्वस्थ करने का करता है।  इसके साथ ही ये आपके पेट दर्द में राहत देने के साथ ही आपकी गैस की समस्या को भी दूर करता है।
  • अलसी के बीज –  अलसी के बीजो में नेचुरल मात्रा काफी ज्यादा फाइबर होता है जो आंतो को राहत देने का काम करता है।  अलसी के बीजों में फएटी एसिड और एन्टिओक्सीटेंड तत्व सूजन को  कम करता है और टॉक्सिन को बाहर निकालता है।
  • गाजर – गाजर में भीफाइबर काफी मात्रा में होता है साथ ही इसमें एंटी -इफ्लेमेंटरी गुण भी होता है।  इसके सेवन से कोलाइटिस में होने वाले दर्द और जलन से राहत दिलाता है।

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