बिम्बाणु या प्लेटलेट्स-Platelets का परिचय , कार्य , कमी के कारण और बढ़ाने के उपाय

इस लेख के मुख्य बिंदु निम्न है –
 बिम्बाणु प्लेटलेट्स का परिचय 
 बिम्बाणु के कार्य –
रक्त में  बिम्बाणु या प्लेटलेट्स में कमी  के लक्षण –
प्लेटलेट्स की कमी के कारण –
बिम्बाणु या  प्लेटलेट्स बढ़ाने के उपाय-
प्लेटलेट्स या बिम्बाणु बढ़ाने के लिए नियमित एक्सरसाइज करे –
इन बातों का भी ध्यान रखे –

बिम्बाणु प्लेटलेट्स का परिचय

बिम्बाणु या प्लेटलेट में उपस्थित अनियमित आकार को छोटी अनाभिकीय कोशिका (यानि वे कोशिकाएं , जिनमे नाभिक नहीं होता , मात्र डीएनए ही होता है ) होती है। इन कोशिकाओं का व्यास लगभग 2 -3 (माइक्रोमीटर) होता है।  प्लेटलेट का रासायनिक नाम लियुकेशाईट है।  एक प्लेटलेट कोशिका का औसत जीवनकाल 8-12 दिन तक होता है। कम प्लेटलेट्स काउंट एक स्वास्थ्य विकार है जिसमे आपके रक्त में प्लेटलेट्स काउंट सामान्य से कम हो जाती है जिसे थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया के रूप में जाना जाता है।  एक स्वस्थ व्यक्ति के प्रति माइक्रोलीटर रक्त में 150,000  से 450,000 प्लेटलेट्स होती है।  जब प्लेटलेट्स की संख्या 150000 प्रति माइक्रो लीटर से नीचे होती है , तो इसे कम प्लेटलेट्स संख्या माना जाता है।

बिम्बाणु या प्लेटलेट्स 

 

बिम्बाणु रक्त का थक्का जमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।  ये केवल स्तनियों के रुधिर में पाई जाती है।  मनुष्य के रक्त में इनकी संख्या 2.5 लाख प्रति घन मिलीमीटर होती है।  बिम्बाणु या प्लेटलेटस क्षतिग्रस्त ऊतकों को सही करते है।  इसके  साथ ही यह रक्तस्त्राव को रोकने का काम करते है।  इस प्रक्रिया का वैज्ञानिक नाम होमियोस्टेसिस है।  प्लेटलेट्स रक्त में मौजूद तत्व होते है , जो पानी रूपी द्रव और कोशिकाओं से बने होते है।
 बिम्बाणु अति सूक्ष्म , केंद्रकविहीन , गोल  या अण्डाकार उभयोत्तर एवं प्लेट के आकार की होती है।  इसे सुक्ष्मदर्शी से ही देखा जा सकता है।  यह अस्थि मज्जा में उपस्थित कोशिकाओं के काफी छोटे कण होते है , जिन्हे तकनीकी भाषा में मेगा कार्योसाइट्स कहा जाता है।

बिम्बाणु के कार्य –

रक्त में उपस्थित बिम्बाणुओं का एक महत्वूर्ण काम शरीर में उपस्थित हार्मोन और प्रोटीन उपलब्ध कराना होता है।  रक्त  धमनी को नुकसान होने की स्थिति में कोलाजन नामक द्रव निकलता है जिससे मिलकर बिम्बाणु एक अस्थाई दीवार का निर्माण करता है और रक्त धमनी को और अधिक क्षति होने से रोकते है। खून के थक्के को ब्लड क्लॉटिंग कहा जाता है।  जिस तरह क्लॉट बनने की प्रक्रिया शुरू  होती है तो आमतौर पर चोट के ठीक होते ही रक्त का थक्का अपने आप घुल जाता है।  किन्तु जब यह प्रक्रिया नहीं हो पाती है तो खून का थक्का बना ही रह जाता है।  प्लेटलेट्स हमारे शरीर में डैमेज ऊतक को ठीक करने के अलावा शरीर में रक्तस्त्राव को भी रोकता है इसे होमियोस्टेसिस भी कहा जाता है।  प्लेटलेट्स हमारे रक्त में मौजूद माइक्रो पार्टिकल्स होते है जिनको हम मेडिकल चेकअप के द्वारा देख सकते है।

रक्त में  बिम्बाणु या प्लेटलेट्स में कमी  के लक्षण –

रक्त में बिम्बाणु की संख्या में कमी होने पर कई प्रकार के लक्षण महसूस होते है।  महिलाओं में प्रेगनेंसी के दौरान प्लेटलेट्स की संख्या में थोड़ी बहुत कमी आ सकती है। जो निमन प्रकार के लक्षण महसूस होते है –
  • मनुष्य के शरीर पर जामुनी और लाल रंग के दाने होना।
  • नाक से खून का आना।
  • मसूड़े से खून आना।
  • लम्बे समय तक घावों से खून का बहना।
  • पीरियड के दौरान अत्यधिक ब्लींडिंग होना।
  • मलाशय के जरिए रक्त का आना।
  • यूरिन में रक्त का आना।

प्लेटलेट्स की कमी के कारण –

प्लेटलेट्स की कमी के कारण दो भागो में विभाजित किए गए है इन्हे निमन प्रकार से समझ सकते है –

1  अस्थि मज्जा की समस्याएं

अस्थि मज्जा आपकी हड्डी के अंदर के नरम ऊतक होते है।  इस जगह से प्लेटलेट्स सहित रक्त के सभी घटकों का उत्पादन होता है।  यदि अस्थि मज्जा पर्याप्त प्लेटलेट्स का उत्पादन नहीं करती तो आपके प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आ जाती है।  जो प्लेटलेट्स के निर्माण में आई कमी के लिए निमन कारण होते है –

  • अप्लास्टिक एनीमिया।
  • विटामिन बी 12 की कमी।
  • आयरन की कमी।
  • संक्रमण होना , जिनमे एचआईवी , एपस्टीन -बार वायरस और चिकन पॉक्स होना शामिल है।
  • ब्लड कैंसर।
  • फोलेट (विटामिन बी 9 ) की कमी।

2 प्लेटलेट्स का नष्ट होना

स्वस्थ शरीर में मौजूद प्रत्येक प्लेटलेट्स करीब दस दिनों तक सही रह सकता है।  प्लेटलेट्स के नष्ट व निर्माण होने की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है।  यदि प्लेटलेट्स के नष्ट होने की संख्या में बढ़ोतरी हो जाए , तो यह स्थिति भी प्लेटलेट्स की कमी का कारण बन जाती है।  ये कारण निमन होते है –

  • रक्त में बैक्टीरिया द्वारा संक्रमण।
  • हिमोलाइटिक यूरिमिक सिंड्रोम (रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने वाला विकार ).
  • प्रसारित इंट्रावस्कुलर कोयग्युलेशन ( रक्त संबंधी रोग )
  • गर्भावस्था।
  • स्वप्रतिरक्षित रोग ( प्रतिरक्षा प्रणाली का विकार ) .

बिम्बाणु या  प्लेटलेट्स बढ़ाने के उपाय-

(1 )  पपीता

पपीता और इसके पत्ते दोनों ही कुछ दिनों के भीतर कम प्लेटलेट्स की संख्या में वृद्धि करने में मदद कर सकते है।   2009 में मलेशिया में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के एशियाई संस्थान में शोधकर्ता ने पाया की डेंगू बुखार में गिरने वाले प्लेटलेट को पपीता के पत्ते के रस के सेवन से बढ़ाया जा सकता है।

(2 ) चुंकदर

चुंकदर का सेवन प्लेटलेट को बढ़ाने वाला एक लोकप्रिय आहार है। यह एंटीऑक्सीडेंट और हेमोस्टेटिक गुणों से भरपूर होने के कारण चुंकदर प्लेटलेट काउंट को कुछ ही दिनों में बढ़ा देता है।  अगर दो से तीन चम्मच चुंकदर के रस को एक गिलास  गाजर के रस में मिलाकर पिया जाये तो ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से  है बढ़ती है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट की मौजूदगी के कारण यह शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को भी बढ़ाते है।

(3 ) नारियल पानी

शरीर में ब्लड प्लेटलेट को बढ़ाने में नारियल का पानी भी बी बहुत मददगार होता है।  नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स अच्छी मात्रा में होते है।  इसके अलावा मिनरल का भी अच्छा स्त्रोत है जो शरीर में ब्लड प्लेटलेट्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है।

(4 ) आंवला

आवंला में मौजूद भरपूर मात्रा में विटामिन सी प्लेटलेट्स के उत्पादन को बढ़ाने और प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करता है।  नियमित रूप से सुबह के समय खाली पेट 3 -4 आवंला खाये।

(5 ) कद्दू

कद्दू कम प्लेटलेट काउंट में सुधार करने वाला एक और उपयोगी आहार है।  यह विटामिन ए से समृद्ध होने के कारण प्लेटलेट के उचित विकास का समर्थन  करने में मदद करता है।  यह कोशिकाओं में उत्पादित प्रोटीन को नियंत्रित करता है , जो प्लेटलेट के स्तर को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होता है।  कद्दू के आधे गिलास जूस में एक से दो चम्मच शहद डालकर दिन में दो बार लेने से भी ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ती है।

(6 ) गिलोय

गिलोय 

 

गिलोय का जूस ब्लड में प्लेटलेट को बढ़ाने में काफी मददगार होता है। दो चुटकी गिलोय के सत्व को एक चम्मच शहद के साथ दिन में दो बार ले या फिर गिलोय की डंडी को रात भर पानी में भिगोकर सुबह उसका छना हुआ पानी पि ले।  इससे ब्लड में प्लेटलेट बढ़ने लगती है।

प्लेटलेट्स या बिम्बाणु बढ़ाने के लिए नियमित एक्सरसाइज करे –

  • जब प्लेटलेट्स 15000 से 20000 के बीच हो तो आप वाकिंग , स्ट्रेचिंग , सिटिंग या स्टेंडिंग एक्सरसाइज कर सकते है।
  • जब प्लेटलेट्स 20000 से 40000 के बिच हो तो आप हल्के प्रतिरोधक जैसे वजन या लोचदार ट्यूबिंग का उपयोग कर सकते है।
  • जब प्लेटलेट्स 40000 से 60000 के बीच होते है तो आप साइकिलिंग  और गोल्फिंग जैसी गतिविधियों का प्रदर्शन कर सकते है।
  • नोट : जब आपकी प्लेटलेट्स की गणना 15000 से कम हो तो सभी तरह के व्यायाम करने से बचे क्योकि इससे रक्तस्त्राव का खतरा बढ़ सकता है।

इन बातों का भी ध्यान रखे-

  • शराब का सेवन सिमित करे क्योकि यह अस्थि मज्जा में प्लेटलेट्स के उत्पादन को कम कर सकता है।
  • इसके अलावा टॉनिक पानी से बचे इससे कम रक्त प्लेटलेट्स की संख्या में योगदान हो सकता है।
  • कच्ची सब्जियां खाने से बचे , जब आपके प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है तो यह आंतो की परत को नुकसान पहुंचा सकती है।  इसके बजाय , वेजटेबल्स को नरम होने तक स्टीम करे और फिर उन्हें खाये।
  • अपने शरीर को रिचार्ज  और अधिक प्लेटलेट्स बनाने में मदद करने के लिए प्रति रात कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद ले।

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