सामान्य ज्ञान / प्रमुख धर्म / जैन धर्म

विश्व में अनेक धर्म हैं जिनमे से भारत में भी बहुत से धर्मो के लोग रहते हैं। आज हम भारत में निवास करने वाले प्रमुख धर्मो के बारे में जानेंगे।  तो दोस्तों आगे बढ़ने से पहले बता दू की पोस्ट को लास्ट तक पढ़ना जरूर।
चलो आगे बढ़ते है।

1. जैन धर्म

 

जैन धर्म / jain dharm
जैन धर्म / jain dharm
  • जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव थे।
  • जैन धर्म के 23 तीर्थकर पार्श्वनाथ थे जो काशी के इक्ष्वाकु वंशीय राजा अश्वसेन के पुत्र थे।  उन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में सन्यास – जीवन को स्वीकारा।  इनके द्वारा दी गयी शिक्षा थी-

(1) हिंसा न करना (2) सदा सत्य बोलना (3) चोरी न करना (4) सम्पति न रखना।
    

जैन धर्म / jain dharm / Mahaveer Swami
जैन धर्म / jain dharm / Mahaveer Swami

 

  • महावीर स्वामी जैन धर्म के 24 वे एवं अंतिम तीर्थकर हुए।
  • महावीर का जन्म 540 ईसा पूर्व में कुंडग्राम ( वैशाली ) में हुआ था।  इनके पिता सिद्धार्थज्ञातृक कुल” के सरदार थे और माता त्रिशला लिच्छवि राजा चेटक की बहन थी।
  • महावीर की पत्नी का नाम यशोदा एवं पुत्री का नाम अनोज्जा प्रियदर्शनी था।
  • महावीर के बचपन का नाम वर्द्धमान था।  इन्होने 30 वर्ष की उम्र में माता – पिता की मृत्यु के पश्चात् अपने बड़े भाई नंदिवर्धन से अनुमति लेकर सन्यास – जीवन को स्वीकारा था।
  • 12 वर्षो की कठिन तपस्या के बाद महावीर को जृम्भिक के समीप ऋजुपलिका नदी के तट पर साल वृक्ष के निचे तपस्या करते हुए सम्पूर्ण ज्ञान का बोध हुआ।  इसी समय से महावीर जिन ( विजेता ), अर्हत ( पूज्य ) और निर्गन्थ ( बंधनहीन ) कहलाय।
  • महावीर ने अपना उपदेश प्राकृत ( अर्द्धमागधी ) भाषा में दिया।
  • महावीर के अनुयायियों के मूलतः निर्ग्रन्थ कहा जाता है।
  • महावीर के प्रथम अनुयाई उनके दामाद (प्रियदर्शनी के पति ) जामिल बने।
  • प्रथम जैन भिक्षुणी नरेश दधिवाहन की पुत्री चंपा थी।
  • महावीर ने अपने शिष्यों को 11 गणधरो में विभाजित किया था।
  • आर्य सुधर्मा अकेला ऐसा गन्धर्व था जो महावीर की मृत्यु के बाद भी जीवित रहा और जैनधर्म का प्रथम तेरा या उपदेशक हुआ।
  • लगभग 300 ईसा पूर्व में मगध में 12 वर्षो का भीषण अकाल पड़ा , जिसके कारन भद्रभाहु अपने शिष्यों सहित कर्नाटक  चले गए. भद्रबाहु के वापस लौटने पर मगध के साधुओ से उनका गहरा मतभेद हो गया जिसके परिणामस्वरूप जैन मत श्वेताम्बर ( श्वेत वस्त्र धारण करने वाले ) एवं भद्रबाहु के शिष्य दिगम्बर ( नग्न रहने वाले ) कहलाय।
  • जैन धर्म के त्रिरत्न है – (1) सम्यक दर्शन (2 ) सम्यक ज्ञान (3) सम्यक आचरण।
  • त्रिरत्न के अनुशीलन में निम्न पांच महाव्रतो का पालन अनिवार्य है – अहिंसा , सत्य वचन , अस्तेय , अपरिग्रह एवं ब्राह्मचार्य।
  • जैन धर्म में ईश्वर की मान्यता नहीं है।
  • जैन धर्म में आत्मा की मान्यता नहीं है।
  • महावीर पुनर्जन्म एवं कर्मवाद में विश्वास करते थे।
  • जैन धर्म के सप्तभंगी ज्ञान के अन्य नाम स्याद्वाद और अनेकानवाद है।
  • जैन धर्म ने अपने आध्यात्मिक विचारो को सांख्य दर्शन से ग्रहण किया।
  • जैन धर्म मानने वाले कुछ राजा थे – उद्दीन , वंदराज , चन्द्रगुप्त मौर्य , कलिंग नरेश खारवेल , राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष , चंदेल शासक।
  • मैसूर के गैंग के मंत्री , चामुंड के प्रोत्साहन से कर्णाटक के श्रवणबेला में 10वीं शताब्दी के मध्य भाग में विशाल बाहुबली की मूर्ति ( गोमतेश्वर की मूर्ति ) का निर्माण किया गया।
  • खजुराहो में जैन मंदिरो का निर्माण चंदेल शासको द्वारा किया गया।
  • मार्योत्तर युग में मथुरा जैन धर्म का प्रसिद्ध केंद्र थे।  मथुरा कला का सम्बन्ध जैनधर्म से है।
  • जैन तीर्थकरो की जीवनी भद्रबाहु द्वारा रचित कल्पसूत्र में है।
  • 72 वर्ष की आयु में महावीर की मृत्यु ( निर्वाण ) 468 ईसा पूर्व में बिहार राज्य के पावापुरी ( राजगीर ) में हो गयी।
  • मल्लराज सृस्तिपाल के राजप्रासाद में महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था।

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