पुष्कर झील 

पुष्करणा ब्राम्हण के द्वारा बनवाये गए जाने के कारन इस झील को पुष्कर झील कहा जाता हैं।
यह एक पप्राकर्तिक ज्वालामुखी झील है इस करना कालाडेरा झील भी कहते हैं।
१८०९ ई में मराठा सरदारों द्वारा इस झील का जीर्णोद्वार करवाया गया।
यह झील धार्मिक दृष्टि से पवित्र हिन्दुओ का तीर्थ राज पांच तीर्थ तीर्थो का मामा सबसे सुन्दर व् प्रदूषित झील हैं यह झील अर्ध्चन्द्राकर बनी हुई हैं।
इस झील के किनारे कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम की रचना की थी।
वेद व्यास ने महाभारत की रचनना इसी झील  के किनारे की थी जिसे पंचम वेद कहा गया
यहाँ ब्रम्हा का प्राचीन मंदिर हैं जिसकी मूर्ति आदि शंकराचार्य द्वारा राखी गयी नविन ब्रम्हा का मंदिर  का निरमंड ासतोरा  बाड़मेर में किया जा रहा है
यह झील अजमेर से 11 किमी दूर उत्तर दिशा nh 52 घाटों का निर्मान नहर राव  करवाया था
इस झील के किनारे भर्तृ बाबा व कण्व मुनि  का आश्रम  है
इसी झील के किनारे विश्वामित्र की तपश्या  मेनका  ने भंग की थी इसी झील के मध्य विश्व का प्रथम यज्ञ हुआ था।
इसी झील  के मध्य वेदव्यास  ने कौरवो पांडवो का दिव्या मिलान करवाया था।
यह राज्य की सबसे बड़ी मीठे पानी की प्राकृतिक झील है।
श्री राम के पिता दशरथ  का पिंड दान भी इसी झील में किया गया
वर्तमान में बालठाकरे की ाष्ठीय  का विषर्जन भी इसी झील में किया गया।
1911 में मैडम मेरी द्वारा  इस झील पर महिला घाट  का निर्माण करवाया गया।  जहह गांधीजी की अस्थियो का विशर्जन किया गया तब से यह घाट गाँधी  घाट के नाम से जाना जाता है।
नक्की झील
यह सिरोही जिले  माउन्ट आबू में स्थित राजस्थान की सर्वाधिक उचाई पर स्थित है तथा यह सबसे गहरी झील है जो सर्दियों में जैम जाती है यह एक विवर्तनिक झील है
किवदंतियो के अनुसार इस झील का निर्माण देवताओ ने अपने नाख़ूनो से खोदकर किया था।
इस झील के मध्य अनेक चट्टानें बिखरी हुई है नंदी रॉक ननरॉक घूँघट निकले स्त्री की आकृति वाली चट्टान टॉड रॉक मेंढक की आकृति वाली चट्टान आदि
इस जेएल के किनारे सनसेट पॉइंट और हनीमून पॉइंट हैं।

सिलीसेढ़ झील

यह अलवर जिले से 12 किमी. दूर स्थित सरिस्का अभ्यारण्य के पास स्थित हैं।
यह एक प्राकृतिक झील हैं इसको वर्तमान   सवरूप महाराजा विनय सिंह द्वारा दिया गया
1845 ई में महाराजा विनय सिंह ने रानी शिला के लिए एक 6  मंजिला महल का निर्माण करवाया था।  जिसमे वर्तमान विनय विलास होटल संचालित हैं।
इस झील की सुंदरता के कारन इसे राजस्थासन   का नंदन कानन कहते है
कोलायत झील
इस झील के किनारे सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि का आश्रम हैं।
 इस झील को शुष्क मरुस्थल का सुन्दर उद्यान कहा जाता है।  चारण जाती के लोग यह नहीं जाते है क्योकि करनी माता द्वारा गॉड लिया गया बचा इस झील में डूबकर मर गया था।  यह एक प्राकृतिक झील है।

कायलाना झील 

यह जोधपुर जिले में स्थित है यह तीनो और पहाड़ियों से घिरी हुई / यह एक प्राकृतिक झील हैं।  जिसको वर्तमान सवरूप सर प्रताप दवरा दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *