रक्त की  सबसे प्रमुख कोशिका लाल रक्त कणिका  है।  यह पूरे रुधिर का 40% भाग होता है। लाल रक्त कोशिकाये हमारे स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा यह रीढ़धारी जंतुओं  के श्वसन के अंगो से ऑक्सीजन लेकर उसे शरीर के विभिन्न अंगो की कोशिकाओं तक पहुंचाने का सबसे सहज और व्याप्त माध्यम है।  इस  कोशिका में केन्द्रक नहीं होता है। इसकी खोज एंटोनी लुवेन हॉक ने की मानव में सबसे छोटी कोशिका आरबीसी को माना जाता है।
इस लेख के मुख्य बिंदु –
आकार 
कुछ सामान्य प्रकार के एनीमिया
लाल रक्त कोशिकाओं की कमी और अधिकता के कारण  होने वाले रोग
लाल रक्त कोशिकाएं कैसे बढ़ाए
(1 )  लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है आयरन 
(2 ) आरबीसी को बढ़ाने के लिए ले  विटामिन बी 12 
(3 ) लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का तरीका है फोलिक एसिड
(4 ) लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का उपाय है विटामिन सी

(5 ) आरबीसी को बढ़ाने के लिए विटामिन ए और कॉपर ले 
(6 ) लाल कोशिकाओं को बढ़ाने के लिए जीवनशैली में बदलाव करे 
लाल रक्त कणिकाएं
लाल रक्त कणिकाएं 

आकार 

ये छोटी , गोल , चपटी टिकिया के आकार की होती है।  इनकी संख्या एक मिमी में लगभग 45 लाख होती है।  इसमें अर्ध तरल जीव द्रव्य होता है।  इसमें एक श्वसन वर्णक पाया जाता है जो एक लौह योगिक होता है।  इसे हीमोग्लोबिन (Haemoglobin ) कहते है। यह एक प्रोटीन होता है जो ऑक्सीजन को शोषित करने का कार्य करता है।  लाल रक्त कोशिकाएं कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ो तक पंहुचा कर उसे शरीर से निकालने का भी काम करती है। यह कोशिका डिस्क के आकार की होती है।  यह परिधि पर मोटा और मध्य में कम मोटा होता है।  विभिन्न जंतुओं में RBC का आकार अलग -अलग होता है। हाथी में सबसे बड़ी जबकि कस्तूरी मृग में सबसे छोटी RBC पाई जाती है। 
 
लाल रक्त  कोशिकाओं का निर्माण अस्थि मज्जा में होता है।  इनका जीवनकाल 120 दिनों का होता है , इसके बाद वे नष्ट हो जाती है।  आयरन युक्त भोजन  लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होते है , विटामिन भी स्वस्थ  लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण  के लिए आवश्यक है।  विटामिन ई , विटामिन बी , बी 12 और बी 3 इन कोशिकाओं के निर्माण में सहायक है। 
 
आहार में लोहे या विटामिन की कमी से कई लाल रक्त कोशिकाओं से संबंधित कई बीमारियां हो सकती है।  लाल रक्त कोशिकाओं से संबंधित कई बीमारियां आनुवांशिक हो सकती है। 
लाल रक्त कोशिकाओं से संबंधित प्रमुख रोग एनीमिया है , जिसमे लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन सामान्य रूप से नहीं  पाता है , जिससे शरीर को ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती है।   एनीमिया से पीड़ित व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य आकार की हो जाती है।  एनीमिया के प्रमुख लक्षणों में थकान , अनियमित दिल की धड़कन , पिली त्वचा , ठंड लगना आदि शामिल है।  लाल रक्त कोशिकाओं की कमी से पीड़ित बच्चो में अन्य बच्चों की तुलना धीरे धीरे विकास होता है।  

कुछ सामान्य प्रकार के एनीमिया इस प्रकार होते है 

  • लोहे की कमी से होने वाला एनीमिया -लोहे की कमी से हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन का निर्माण नहीं हो पता है, यह एनीमिया का सबसे आम रूप है।  लोहे की कमी होने के कारणों में  कम लोहे युक्त भोजन , रक्त की एक अचानक हानि ( जैसे की माहवारी से ) या दुर्घटना आदि से या  भोजन से पर्याप्त लोहे को अवशोषित करने में असमर्थता है। 
  • दात्र कोशिका अरक्तता –  यह एक आनुवंशिक रोग है।  इसमें लाल रक्त कोशिकाएं अपने सामान्य वृत्ताकार आकार की बजाय अर्ध चंद्राकर आकार की हो जाती है।  जिसके कारण यह चिपचिपी हो जाती है और सामान्य रूप से रक्त वाहिकाओं में प्रवाह करने में असमर्थ हो जाती है।  इस कारण रोगी को तीव्र दर्द और संक्रमण भी हो सकता है।  यह पैदा होने की तुलना में तेजी से नष्ट होती है।  यह कोशिकाएं सिर्फ 10 -20 दिनों में ही नष्ट हो जाती है। 
  • नॉर्मोसाइट एनीमिया –  इस प्रकार का एनीमिया तब होता है जब हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं तो सामान्य आकार की ही होती है , परन्तु इनकी मात्रा हमारे शरीर  की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती है।  इस प्रकार का एनीमिया लम्बी अवधि के रोगों जैसे की गुर्दे की बीमारी , कैंसर या रूमेटाइड संधिशोथ आदि के पश्चात हो सकते है। 
  • हिमोलिटिक अरक्तता –  यह एनीमिया तब होता है जब हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं किसी असामान्य प्रक्रिया द्वारा नष्ट होने लगती है और शरीर में पर्याप्त मात्रा में लाल रक्त कणिकाएं उपलब्ध नहीं होती है और अस्थि मज्जा के मांग के अनुसार लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण भी नहीं हो पाता है। 
  • फैनकोनी एनीमिया –  यह एक दुर्लभ आनुवंशिक रोग है , जिसमे अस्थि मज्जा  कोशिकाओं सहित रक्त के घटको को पर्याप्त मात्रा में बना पाने में सक्षम नहीं  हो पाता है। इस बीमारी के साथ पैदा हुए बच्चो में गंभीर रक्त संबंधी बीमारियां पाई जाती है और उनमे शवेताणु रक्तता या ल्यूकेमिया का भी विकास हो सकता है। 

लाल रक्त कोशिकाओं की कमी और अधिकता के कारण  होने वाले रोग 


लाल रक्त कोशिकाओं की कमी होने के कारण –

  • रक्तस्त्राव अधिक होना। 
  • कुपोषण। 
  • किडनी संबंधी रोग होना। 
  • अस्थि मज्जा का कार्य न कर पाना। 
  • शरीर में पानी की अधिकता होना। 

लाल रक्त कोशिकाओं की अधिकता के कारण 

लाल रक्त कोशिकाओं का सामान्य संख्या से अधिक होना व्यक्ति के लिए खतरनाक होता है और यह घातक स्थिति पैदा कर सकता है।  इसके निमन कारण हो सकते है –
 
  • ह्रदय संबंधी रोग। 
  • धूम्रपान करना। 
  • अस्थि मज्जा संबंधी रोग होना। 
  • शरीर में पानी की कमी आदि। 

लाल रक्त कोशिकाएं कैसे बढ़ाए 

(1 )  लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है आयरन 

आयरन एक ऐसा पोषक तत्व है , जिसे आमतौर पर एनीमिया से जोड़कर देखा जाता है। शरीर में आयरन का उपयोग हीमोग्लोबिन के निर्माण में करता है।  हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं में ऑक्सीजन का संग्रह करता है।  आयरन के बिना लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो सकती है या शरीर के विभिन्न अंगो में ऑक्सीजन पहुंचाने में असमर्थ हो सकती है।  
बच्चो में रोजाना 7 से 10 मिलीग्राम , किशोर लड़कियों को करीब 15 मिलीग्राम और गर्भधारण करने की आयु वाली महिलाओं (20 से 35 आयु की महिकाएँ ) को करीब 18 मिलीग्राम आयरन लेने की आवश्यकता होती है। 
 
आयरन में समृद्ध आहार के सेवन से शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ सकता है।  अपने आहार में पर्याप्त मात्रा में आयरन लेने के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक व ड्राई फ्रूट , ब्रोकली और अंडे की जर्दी को शामिल करना चाहिए। 

(2 ) आरबीसी को बढ़ाने के लिए ले  विटामिन बी 12 

विटामिन बी 12 मस्तिष्क के कार्यो और लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने के लिए महत्वपूर्ण होता है।  शरीर में विटामिन बी 12 की कमी लाल रक्त कोशिकाओं को पूरा बनने से रोकती है।  इस कमी वजह से लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य हो जाती है , इसको मेगलोब्लास्ट्स और मेगालोब्लास्टिक एनीमिया कहा जाता है। 
विटामिन बी 12 लेने के लिए अपने आहार रेड मीट , मछली , डेयरी उत्पाद जैसे दूध व चीज आदि को शामिल करना चाहिए। विटामिन बी हमारे शरीर को जीवाणुओं से संघर्ष करने की शक्ति प्रदान करता है।  विटामिन बी का उपयोग हमारे मुँह , जीभ और नेत्रों के लिए बहुत ही जरूरी है।  

(3 ) लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का तरीका है फोलिक एसिड 

विटामिन बी 9 को फोलिक एसिड और फोलेट के नाम से भी जाना जाता है।  विटामिन बी 12 और आयरन की तरह यह सीधे लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण से नहीं जुड़ा है , लेकिन यह कोशिकाओं के विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या को प्रभावित करता है।  एक वयस्क को रोजाना 400 से 600 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड लेने की आवश्यकता होती है यह मल्टीविभाजन में भी मौजूद होती है।
 
यदि व्यक्ति  पर्याप्त मात्रा में फोलेट नहीं लेता है तो इससे उसकी लाल रक्त कोशिकाएं पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाती है।  जिसकी वजह से एनीमिया होने और हीमोग्लोबिन का  स्तर कम होने की आशंका बढ़ जाती है।फोलेट हीमोग्लोबिन के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
 
हीमोग्लोबिन के एक घटक हेमे को बनाने के लिए फोलेट की आवश्यकता होती है , हेमे के  द्वारा ही रक्त से ऑक्सीजन सभी अंगो तक पहुंच  पाती है।  फोलिक एसिड पर्याप्त मात्रा में लेने के  लिए अपने आहार में फोलेट में समृद्ध स्त्रोतों जैसे चावल , पालक , मूंगफली , राजमा और एवोकाडो आदि को शामिल कर सकते है। 
 

(4 ) लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने का उपाय है विटामिन सी 

विटामिन सी सीधे तौर पर  रक्त कोशिकाओं को प्रभावित नहीं ,  लेकिन इससे शरीर में आयरन को अवशोषित होने में मदद मिलती है। विटामिन सी शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है।  विटामिन सी शारीरिक क्षमता को बढ़ाने के लिए आवयश्क है, तथा तनाव को कम करता है।  विटामिन सी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।  आहार में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में लेने के लिए आपको विटामिन सी से समृद्ध स्रोतों जैसे कीवी , स्ट्राबेरी , संतरे व खट्टे फलों को शामिल करना चाहिए।  यह कई तरह के कैंसर के जोखिम को बढ़ने से भी रोकता है।  

(5 ) आरबीसी को बढ़ाने के लिए विटामिन ए और कॉपर ले 

शरीर द्वारा रक्तधारा में मौजूद आयरन का उपयोग होने के लिए कॉपर एक जरूरी मिनरल्स माना जाता है।  यदि शरीर में कॉपर की पर्याप्त मात्रा नहीं हो तो रक्त कोशिकाओं को जीवित रहने के लिए आवश्यक आयरन को अवशोषित करने में मुश्किल आती है।  कॉपर पर्याप्त मात्रा में लेने के लिए अपनी डाइट में काजू , सूरजमुखी के बीज और दालों को शामिल करना चाहिए।  
 
लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या में विटामिन ए कॉपर की तरह मदद करता है , विटामिन ए को रेटिनाल भी कहा जाता है।  यह कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए होने वाले आयरन के अवशोषण में सहायक होता है। 
विटामिन ए में समृद आहार जैसे शकरकंद ,गाजर , हरी पत्तेदार सब्जियां आदि को शामिल करना चाहिए। 
 

(6 ) लाल कोशिकाओं को बढ़ाने के लिए जीवनशैली में बदलाव करे 

  • नियमित एक्सरसाइज करे –    एक्सरसाइज हर किसी के लिए फायदेमंद होती है , लेकिन स्वस्थ लाल कोशिकाओं के निर्माण में एक्सरसाइज काफी महत्वूर्ण मानी जाती है।  अधिक तेजी से की जाने वाली एक्सरसाइज  से ह्रदय दर में बढ़ोतरी होती है , जिसके कारण शरीर और मस्तिष्क को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।  इसके कारण दिल तेज -तेज धड़कने लगता है और फेफड़े जल्दी -जल्दी गहरी सांसे लेना शुरू कर देते है। 
       ऑक्सीजन की आवश्यकता को पूरा करने के लिए शरीर लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने के लिए उत्तेजित           होता है।  स्वस्थ आहार  के साथ नियमित एक्सरसाइज करने से अस्थि मज्जा में लाल रक्त कोशिकाओं को          बनने में मदद मिलती है। अपनी एक्सरसाइज में आप दौड़ना , जॉगिंग करना , साइकिलिंग , स्विमिंग और            एरोबिक्स को शामिल कर सकते है। 
  • धूम्रपान और शराब ना पिएं –  अगर आप अपनी लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाना चाहते है तो आपको धूम्रपान और शराब पिने की आदत को छोड़ना होगा।  सिगरेट पीने से आपके शरीर का रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और इससे सभी अंगो तक ऑक्सीजन सही से नहीं पहुंच पाती है।  इसके साथ ही अस्थि मज्जा में ओक्सिजन की कमी होने लगती है। 
       इसके अलावा शराब पीने से रक्त गाढ़ा होने लगता है और इससे भी रक्त में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है।  अधिक मात्रा में शराब पीने से लाल रक्त कोशिकाएं कम बनती है और पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाती है। 

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