टर्नर सिंड्रोम (TURNER SYNDROME )

टर्नर सिंड्रोम क्या है –
 
टर्नर सिंड्रोम (टीएस ) , जिसे 45X या 45XO  भी कहा जाता है। टर्नर सिंड्रोम एक अनुवाशिंक  सिंड्रोम है , जो की केवल महिलाओं को प्रभावित करती है।  1959 में फोर्ड और उनके साथियों ने खोजा की टर्नर सिंड्रोम से ग्रसित महिलाओं में केवल एक X – गुणसूत्र की कमी होती है।  टर्नर सिंड्रोम से ग्रसित महिला का गुणसूत्र प्ररूप 44A +XO = 45  होता है। इसे 44A +X = 45 द्वारा भी प्रदर्शित किया जाता है।  एक गुणसूत्र के कारण मादा शरीर का विकास होता है।  दूसरे X – गुणसूत्र की कमी के कारण टर्नर सिंड्रोम से ग्रसित मादा में अण्डाशय का पूर्ण विकास नहीं होता है।  टर्नर सिंड्रोम एक गुणसूत्र असामान्यता के कारण होता है जिसमे X गुणसूत्रों में से किसी एक का हिस्सा या भाग बदल जाता है जबकि अधिकांश लोगो में 46 गुणसूत्र होते है , टाइस वाले  लोगो में आमतौर पर 45  गुणसूत्र होते है।  टर्नर सिंड्रोम 3000 मादा बच्चों में से एक में यह अनुवाशिंक विकास पाया जाता है।

 

टर्नर सिंड्रोम जेनेटिक डिसऑर्डर की वजह से होने वाली बीमारी है , जिसका असर हमारे क्रोमोजोम पर पड़ता है।  क्रोमोजोम में जीन शामिल होते है , जिससे डीएनए बनता है।  क्रोमोजोम की भूमिका महत्वपूर्ण होती है , इसके साथ ही यह हर व्यक्ति का शरीर अलग -अलग ढंग से करते है।
टर्नर  सिंड्रोम के लक्षण –
  • इनका कद औसतन छोटा (4 फुट 10 इंच )रहता है
  • इनमे स्तन ग्रंथिया विकसित नहीं होती है।
  • इनके अण्डाशय में संयोजक ऊतक अधिक होते है और मादा हार्मोन एस्ट्रोन का स्रवण नहीं होता है।
  • हाथों और पैरों में सूजन , विशेष रूप से जन्म के समय।
  • इनकी गर्दन की त्वचा पर झिल्ली का विलन पाया जाता है।
  • माहवारी की अनुपस्थिति या बंद होना।
  • कान संक्रमण और सुनने की हानि।
  • टर्नर सिंड्रोम की समस्या होने पर गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है।  यही नहीं दिल की बीमारी , किडनी की बीमारी , बाल झड़ना इस तरह की बीमारी शुरू हो सकती है।
  • आमतौर पर लड़कियो और महिलाओं के सोचने और समझने की शक्ति भी कम  होती है।
  • सामान्य से छोटी गर्दन , ज्यादा और चौड़ा सीना , बड़े या छोटे कान या कोई शारीरिक समस्या। ऐसे में इन  लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गुणसूत्र क्या है ?
प्रत्येक प्रजाति में गुणसूत्रों (CHROMOSOME ) की संख्या निश्चित  रहती है।  मानव कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या 46 होती है जो 23 के  जोड़े में होते है।  इनमे से 22 अलिंग यानि समजात गुणसूत्र जो नर  मादा में समान होते है।  और एक जोड़ लिंग गुणसूत्र होता है जो नर और मादा में दोनों में अलग -अलग होते है।  नर में जो दो गुणसूत्र होते है उसे  XY कहते है और मादा में जो गुणसूत्र होते है उसे XX  कहते है।
यानि महिला और पुरुष दोनों में एक गुणसूत्र X समान होता है सिर्फ एक दूसरा गुणसूत्र Y जो दोनों में अलग होता है।
कोष विभाजन के दौरान मादा अंडकोष के विभाजन में दो X गुणसूत्र अलग पड़ते है और ऐसे ही पुरुष के कोष में से एक X और एक Y अलग पड़ते है।
फर्टिलाइजेशन के दौरान महिला का कोई भी अंडकोष में X ही होता है लेकिन जब पुरुष का X गुणसूत्र महिला के X गुणसूत्र से मिलता है तो दोनों XX बन जाते है मतलब मादा बनती है और अगर महिला का X और  पुरुष का Y मिलता है तो XY बन जाता है मतलब नर बनता है।
टर्नर सिंड्रोम के कारण –
 
अधिकतर लोग दो सेक्स क्रोमोसोम यानि लिंग गुणसूत्र के साथ पैदा होते है।  लड़को को अपनी  को अपनी माताओं से X गुणसूत्र और  अपने पिता से Y गुणसूत्र विरासत में मिलते है।  लड़कियों को प्रत्यके माता -पिता से एक X गुणसूत्र विरासत में मिलता है। . टर्नर सिंड्रोम वाले लड़कियों में , X गुणसूत्र की एक प्रति गायब होती है , आंशिक रूप से गायब या बदली हुयी होती है।
टर्नर सिंड्रोम के अनुवाशिंक परिवर्तन निम्न में से एक हो सकते है –
  • मोनोसोमी  -एक गुणसूत्र की पूर्ण अनुपस्थिति आमतौर पर पिता के शुक्राणु या माँ के अंडे में त्रुटि के कारण होती है।   यह शरीर में हर कोशिका में केवल एक X गुणसूत्र होता है।
  • मौजेसिज्म – कुछ मामलो में भ्रूण के विकास के शुरूआती चरणों के दौरान कोशिका विभाजन में एक त्रुटि  होती है इससे शरीर में कुछ कोशिकाओं में X गुणसूत्र की दो पूर्ण प्रतियां होती है।  अन्य कोशिकाओं में X क्रोमोसोम की केवल एक प्रति है।
टर्नर सिंड्रोम का इलाज कैसे किया जाता है –
टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित महिलाओं की ऊंचाई बढ़ाने के लिए हार्मोन थेरेपी का उपयोग किया जाता है।  पुन : संयोजक विकास हार्मोन उन्हें हर दिन इंजेक्शन के  रूप में दिया जाता है।  डॉक्टर छोटी कद वाली लड़कियों  ऑक्सन्ड्रोलोन हार्मोन की सलाह देते देते है।  यह शरीर के प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप हड्डी खनिज घनत्व में सुधार  होता है और ऊंचाई में वृद्धि होती है। ट्यूबर सिंड्रोम से पीड़ित एक लड़की के लिए युवावस्था शुरू करने के लिए एस्ट्रोजेन थेरेपी की आवश्यकता होती है।  यह उपचार 10 -12 साल की उम्र में शुरू होना चाहिए और रजोनिवृती की औसत आयु तक पहुंचने तक जारी रहना चाहिए।
टर्नर सिंड्रोम की जटिलताओं –
टर्नर सिंड्रोम कई शरीर प्रणालियों के समुचित विकास को प्रभावित कर सकता है , लेकिन सिंड्रोम वाले व्यक्तियों में बहुत  भिन्न होता है।  आने वाली जटिलताओं में शामिल हो सकते है –
  • ह्रदय  समस्याएं – टर्नर सिंड्रोम वाले कई शिशु ह्रदय दोष या ह्रदय की संरचना में मामूली असामान्यता के साथ पैदा होते है  जो गंभीर जटिलताओं के जोखिम को बढ़ाते है।  ह्रदय के दोषो में अक्सर महाधमनी के साथ समस्यां शामिल होती है।
  • बहरापन – टर्नर  सिंड्रोम के साथ बहरापन आम है।  कुछ मामलो में यह तंत्रिका कार्य के क्रमिक  नुकसान के कारण होता है।
  • नजरो की समस्या -टर्नर सिंड्रोम वाली लड़कियों में आँखों के मूवमेंट , निकट द्रष्टि समस्याओं और कमजोर मांसपेशियों के नियंत्रण का खतरा बढ़ जाता है।
  • किडनी से संबंधित समस्यांए – टर्नर सिंड्रोम वाली लड़कियों में किडनी की कुछ खराबी हो सकती है।
  • कंकाल की समस्याएं–  हड्डियों के विकास के और विकास साथ समस्याएं रीढ़ की हड्डी ( स्कोलियोसिस ) की असामान्य वक्रता और ऊपरी पीठ (काइफोसिस ) के आगे बढ़ने के जोखिम  बढ़ाती है।  टर्नर सिंड्रोम  वाली महिलाओं को कमजोर , भंगुर हड्डियों (ऑस्टियोपोरोसिस ) के विकास का  खतरा भी होता है।
  • सीखने में कमजोरी – टर्नर सिंड्रोम वाली लड़कियों और महिलाओं में आमतौर पर सामान्य बुद्धि होती है। हालाँकि , सीखने की अक्षमता  बढ़ जाता है , सिखने के साथ जिसमे गणित , स्मृति और ध्यान शामिल होते है। .

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