कोशिका भित्ति की संरचना –  जीवाणु एवं वनस्पति कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के बाहर निर्जीव , पारगम्य तथा मोटी दीवाल  पायी जाती है उसे ही कोशिका भित्ति कहते है।  कोशिका भित्ति का निर्माण सेलुलोज , पेक्टोज ,तथा अन्य निर्जीव पदार्थो द्वारा होता है।कोशिका भित्ति का मुख्य कार्य कोशिका को आकृति प्रदान करना एवं प्रोटोप्लाज्म की रक्षा करना है।
कोशिका भित्ति (Cell Wall )
कोशिका भित्ति (Cell Wall 
कोशिका भित्ति जीवाणुओं की कोशिका का बाह्मा ढृढ़ भाग बनाती है, यह  जीवाणु की आकृति को बनाये रखने का कार्य करती है।  कोशिका भित्ति को विभेदी तकनीक द्वारा अभिरंजन  देने पर यह अभिरंजन ग्रहण करती है तथा इसे इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा ही देखा  जा सकता है।
जीवाणु कोशिका भित्ति लगभग 10. 25 nm मोटाई की होती है। यह कोशिका के शुष्क  भार का 20 से 30% भाग होती है।  यदि जीवाणुओं को लवणीय हाइपरटोनिक विलयन में कुछ समय रखा जाये तो जीवाणु कोशिका के भीतर का कोशिकाद्रव्य बाहर निकल  जाता है तथा जीवद्रव्य सिकुड़ जाता है इस स्थिति में कोशिका भित्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
प्रोकेरयोटा की कोशिका भित्ति में पेप्टिग्लाइकोज पाया जाता है , यह विशिष्ट प्रकार का कार्बोहाइड्रेट म्यूकोपेटाइड होता है।  यह जटिल कार्बोहाइड्रेट्स एवं एमिनो अम्लों  से बना होता है।

 कोशिका भित्ति के प्रकार –

 कोशिका भित्ति तीन प्रकार की होती है।  लेकिन कुछ पादपों के लिए तृतीयक कोशिका भित्ति को परिभाषित किया जाता है।
  1. मध्य पट्टिका (Middle Lamella ) 
  2. प्राथमिक भित्ति (Primary Wall )
  3. द्वितीयक भित्ति (secondary Wall )
  4. तृतीयक भित्ति (Tertiary Wall )

1 मध्य पट्टिका – 

  • यह फ्रेगमोप्लास्ट से कोशिका विभाजन के दौरान  बनने वाली पहली परत है यह कोशिका की सबसे बाहरी परत होती है।
  • यह दो आसन्न कोशिकाओं के मध्य होती है।
  • यह कैल्शियम तथा मैगनीशियम पेक्टिन और प्रोटीन से बनी होती है।

2 प्राथमिक भित्ति –

  • यह पेक्टिन , सेल्यूलोज , हेमिसेल्यूलोज और प्रोटीन से बनी होती है।
  • यह मध्य लामेला के बाद बनती है।
  • सभी वनस्पति कोशिकाओं के मध्य पुटिका और प्राथमिक भित्ति होती है।

3  द्वितीयक भित्ति –

  • कोशिका की वृद्धि बंद होने के बाद यह बनती है।
  • यह अत्यंत कठोर होती है।
  • इनका निर्माण लिगनिन का जमाव होने से होता है।
  • यह सेल्यूलोज  और लिगनिन से बनी होती है।

4  तृतीयक भित्ति –

  • यह कोशिका भित्ति की सबसे आंतरिक परत है।
  • यह कुछ जिमनोस्पर्म पादपों के जायलम की वाहिका में पाई जाती है।
  • यह जाइलान नामक कार्बोहाइड्रेट की बनी होती है।

कोशिका भित्ति के कार्य –

  • कोशिका आकार को बनाए रखना और आकार का निर्धारण करना।
  • पानी के दबाव के कारण कोशिका झिल्ली टूटने से रोकता है।
  • कोशिका को यांत्रिक सहारा प्रदान करना।
  • कोशिका भित्ति में जैव रासयनिक गतिविधि कोशिका व कोशिका के मध्य संचार में योगदान करती है।
  • कीड़े और रोगजनकों से यांत्रिक सुरक्षा प्रदान करता है।

कोशिका भित्ति की परासंरचना –

(1 ) तंतु/ रेशक (Fibril )-

  • लगभग 3000 ग्लूकोज अणुओं से एक सेल्यूलोज अणु बनता है।
  • 100 सेलुलोज अणु एक मिसेल बनाते है।
  • 20 मिसेल एक सूक्ष्म फाइब्रिल बनाते है।
  • 250 माइक्रो -फाइब्रिल 250 A व्यास के सेलुलोज का मैक्रो फाइब्रिल बनाते है।
  • रेशक प्राथमिक भित्ति में धुरी के उधर्व और द्वितीयक भित्ति  में समानांतर पाए जाते है।

(2 )  मैट्रिक्स (Matrix )-

  • यह cell wall का आधारी भाग है।
  • इसमें हेमिसेल्यूलोज , पेक्टिन , ग्लाइकोप्रोटीन , लिपिड और पानी होते है।
  • यह रेशक के रिक्त स्थान के बीच पायी जाती है।
  • कोशिका भित्ति में लाइपोपोलीसेकेराइड (LPS ) तथा चार मुख्य प्रकार के प्रोटीन उपस्थित रहते है।
  • लाइकोप्रोटीन भी कोशिका भित्ति का एक प्रमुख घटक है।

(3 ) प्रोटीन 2 –

  • ये मेट्रिक्स प्रोटीन के समान ही होते है।
  • इनका अणुभार भी इनके समान ही होता है।
  • ये पेप्टिग्लाइकन स्तर से ढृढ़ता के साथ जुड़े रहते है।
  • प्रोटीन 2 में मैट्रिक्स में पाए जाने वाले पॉलीपेप्टाइड से भिन्न के पॉलिपेटाइड रहते है।

(4 ) प्रोटीन 3 –

  • ये ट्रिप्सिन संवेदी होते है।
  • ये सतह तक फैले होते है।
  • ये जिवानुभक्षी होते है।

(5 ) लाइपोपोलिसेकेराइड्स –

  • लाइपोपोलिसेकेराइड्स  (LPS ) गैस अग्राही जीवाणुओं की कोशिका भित्ति में सतह पर पाए जाते है।
  • LPS जल अपघटन द्वारा अपने घटकों में विभक्त हो जाता है।
  • ये लिपिड A के साथ सहसंयोजी बन्धो द्वारा जुड़कर जटिल बनाते है।

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