क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome ) क्या है, इसके लक्षण , कारण एवं इलाज।

जब पुरुषो में अतिरिक्त X – क्रोमोसोम आ  जाता है , तो उस स्थिति को क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम कहते है।
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम 1951 में जेकब्स व स्ट्रांग ने प्रदर्शित किया।  इसके अनुसार जो नर क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम से ग्रसित होते है उनका गुणसूत्र प्ररूप 44A +XXY = 47 होता है। क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम एक आनुवांशिक बीमारी है।  5000 नर बच्चों में से एक बच्चे में इस सिंड्रोम की शिकायत पाई  जाती है।
आइए जानते है  इसके बारे में विस्तार से।

 

इसके निम्न लेख बिंदु इस प्रकार है –
  • क्या होता है क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम ?
  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम के लक्षण क्या है ?
  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम के कारण। 
  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का इलाज। 
  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का निदान। 
  • डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए। 
क्या होता है क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम-
 
 
 

 

 

क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम पुरुषो में होने वाली समस्या है।  इस स्थिति में पुरूषो में प्यूबर्टी के लक्षण ठीक तरह से शुरू नहीं हो पाते। मानव शरीर में गुणसूत्र की संख्या 23 जोड़ी होती है जिसमे से 22 जोड़ गुणसूत्र यानि क्रोमोजोम्स पुरुषो और महिलाओं में समान  होती है और एक जोड़ दोनों मे अलग -अलग होती है जिसमे महिलाओं में XY और  पुरुषो में XX क्रोमोसोम होते है।  लेकिन कभी गुणसूत्र की त्रुटि के कारण पुरुषो में एक एक्स्ट्रा X क्रोमोसोम (XXY )  होने की स्थिति को क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम कहते है।  क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (केएस ) जिसे 47 , XXY या XXY  भी कहा जाता है।  अक्सर यह केवल युवावस्था में होता है।  यदि तीन या अधिक एक्स गुणसूत्र  मौजूद हो तो लक्षण और अधिक गंभीर होने लगते  है।
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम  लक्षण क्या है ?
छोटे बच्चो में
  • कमजोर मांसपेशियां।
  • बोलने में देरी।
  • हर्निया।
  • एनर्जी कम रहना।
किशोरों में
  • मसल्स का  कम विकसित होना।
  •  छोटे टेस्टिकल्स।
  • गाइनेकोमेस्टिया (पुरुष में बड़े स्तन )
  • परिवार की तुलना में अधिक लम्बाई।
पुरुषो में –
  • इरेक्शन की कमी।
  • छोटे पेनिस।
  • स्पर्म काउंट का कम होना।
  • दाढ़ी का ठीक से विकास नहीं होना।
  • अंडरआर्म या प्यूबिक हेयर का कम होना।
  • कैल्शियम की कमी के कारण ऑस्टियोपरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
  • शरीर में कम बालो का होना।
  • पर्याप्त शुक्राणु न बनने के  कारण बच्चे न पैदा कर पाना।
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम के कारण –
  • प्रत्येक कोशिका में अधिक X  गुणसूत्र की एक या अधिक से प्रतिलिपि।
  • क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम अनुवाशिंक बीमारी है।  जैसा की हम जानते है की सामान्य पुरुषो में XY और महिलाओं में XX क्रोमोसोम होता है।  पुरुषो में एक्स्ट्रा X क्रोमोसोम होने की स्थिति में क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम होता है।  ऐसे पुरुषो में यौवन के लक्षण ठीक तरह से डेवलप नहीं हो पाते है।
  • कुछ कोशिकाओं में अतिरिक्त X गुणसूत्र (मोजेक क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम ). होता है।
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का इलाज –
हालाँकि क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम के सेक्स क्रोमोसोम परिवर्तनो को ठीक करने का कोई तरीका नहीं है , लेकिन उपचार इसके प्रभावों को कम करने में मदद कर सकता है।  पहले एक निदान किया जाता है फिर उपचार शुरू किया जाता है।
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम के लिए उपचार संकेत और लक्षणों पर आधारित है और इसमें शामिल हो सकते है –
टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी- 
यौवन की सामान्य शुरुआत  के समय , टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी को उन परिवर्तनों को उत्तेजिक  करने में दिया जा सकता है जो आमतौर पर यौवन में  होते है , जैसे की चेहरे और शरीर के बालो का बढ़ना ,मासंपेशियों में वृद्धि और यौन इच्छा।
टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी हड्डियों के घनत्व में भी सुधार कर सकती है और यह मूड और व्यवहार में सुधार कर सकती है।  हालाँकि इससे बाँझपन में सुधार नहीं होगा।
स्तन ऊतक निकालना –
बढ़े हुए स्तनों को विकसित करने वाले पुरुषो में प्लास्टिक सर्जन द्वारा अतिरिक्त स्तन ऊतक को हटाया जा  सकता है, जिससे एक अधिक दिखने वाली छाती निकाली जाती है।
टेस्टिकल को निचे उतारना –
अगर बच्चे का टेस्टिकल ऊपर ही रहता है तो सर्जरी के माध्यम से नीचे लाया जा सकता है।  शुक्रकोष के सामान्य उत्पादन  टेस्टिकल का शरीर से निचे होना जरूरी है।
स्पीच थेरेपी –
ये उपचार क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम  वाले लड़को की मदद करने के लिए किया जाता है , जिन्हें भाषण , भाषा और मासंपेशियों की कमजोरी की समस्या है।
प्रजनन उपचार –
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम वाले अधिकांश पुरुष आमतौर पर पिता बनने में असमर्थ होते है , क्योकि इसके शुक्रकोष में कोई शुक्राणु उतपन्न  नहीं होते है या बहुत कम होते है। न्यूनतम शुक्राणु उत्पादन वाले  कुछ पुरुषों के लिए इंट्रासाइटोप्लाज्मिक शुक्राणु इंजेक्शन (ICSI ) नामक एक प्रक्रिया मदद कर सकती है ICSI के दौरान , शुक्राणु को शुक्रकोष से एक बायोप्सी सुई के साथ निकाला जाता है और सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है।
मनोवैज्ञानिक परामर्श –
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम होना एक चुनौती हो सकती है , खासकर युवावस्था और युवा वयस्कता के दौरान।  ऐसी स्थिति वाले पुरुषो के लिए , बाझँपन का मुकाबला करना मुश्किल हो सकता है।  एक परिवार चिकित्सक परामर्शदाता या मनोवैज्ञानिक भावनात्मक मुद्दों के माध्यम से काम करने में मदद कर सकते है।
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का निदान –
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का निदान कैसे किया जाता है इसके निदान के लिए उपयोग किये जाने वाले मुख्य परीक्षण है –
हार्मोन परीक्षण –
रक्त या मूत्र के नमूने असामान्य हार्मोन के स्तर को प्रदर्शित कर सकते है।   नमूने में अगर टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का निमन स्तर पाया जाता है तो क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम का संकेत है।
गुणसूत्र विश्लेषण –
इसको क्रियोटाइप विश्लेषण भी कहा  जाता है , इस परीक्षण का उपयोग क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम के निदान की पुष्टि करने में किया जाता है।  गुणसूत्रों की आकृति और संख्या की जाँच के लिए एक रक्त का नमूना लैब में भेजा जाता है।
डॉक्टर को कब  दिखाना चाहिए –
  • अगर लड़के का  विकास अन्य लड़कों की तुलना में धीरे हो , तो डॉक्टर से सम्पर्क करे।
  • स्तन का बड़ा होना।
  • पेनिस और टेस्टिकल्स का छोटा होना।
  • अनप्रोटेक्टेड सेक्स करने के बाद भी महिला (पार्टनर ) का प्रेंगनेट नहीं होने पर भी पुरुष को भी डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।
नोट – इन लक्षणों के अलावा और भी लक्षण हो सकते है इसलिए इन लक्षणों के अलावा कोई अन्य लक्षण होने पर डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए।

 

 

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