क्या है एसएमए SMA 1 बीमारी , इसके लक्षण , इलाज।

दुनिया में  ऐसी कई बीमारियां है , जिनके बारे में  अधिकतर लोगों को पता नहीं होता , लेकिन ये बीमारियां बहुत जानलेवा होती है।  जैसे की – स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी , जो की  एक आनुवांशिक बीमारी है।
ये बीमारी कई प्रकार की होती है , लेकिन  इसमें  टाइप 1 सबसे गंभीर होती है।
क्या है एसएमए  (SMA1 ) बीमारी 
जेनेटिक स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी यानि (SMA ), शरीर में SMN -1 जीन की कमी के कारण होता है।  यह बीमारी अधिकतर बच्चों को होती है , इस बीमारी से सीने की मासपेशियां कमजोर होने  लगती है।  यह बीमारी ज्यादा बढ़ जाने पर रोगी की मृत्यु भी हो जाती है। दुनिया में सबसे ज्यादा ये बीमारी ब्रिटेन में फली हुई है।
स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी ( SPINAL  MUSCULAR ATROPHY ) वंशानुगत बीमारियों का एक समहू है जो मस्तिष्क के स्टेम और रीढ़ की हड्डी में मोटर न्यूरॉन्स तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इस बीमारी से बच्चा पूरी तरह से निष्क्रिय सा हो जाता है।
स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी क्यों होता है –
स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी एक आनुवांशिक बीमारी है जो परिवार के सदस्यों से होते हुए बच्चों में जाती है।  अगर आपका स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी है तो उसके जीन में नुक्स है बच्चें में अगर किसी एक का जीन खराब है  तो उसे स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी रोग नहीं होगा , लेकिन वो इस बीमारी से संक्रमित रहेगा।
स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी का परीक्षण करना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि  इसके लक्षण अन्य बीमारियों के लक्षणों के समान होते है।
लक्षण जानने के लिए डॉक्टर आपके बच्चे के बारे में पूछताछ करेगा  जैसे –
  • क्या आपके बच्चे को सिर उठाने में या मुड़ने में दिक्क्त होती है ?
  • क्या बच्चे को बैठने या खुद से खड़े होने में परेशानी होती ?
  • क्या आपके परिवार  में  पहले कभी ऐसे लक्षण देखने को मिले है ?
 
स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी के प्रकार 
स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी  तीन प्रकार के होते है जो 1 वर्ष की आयु से पहले बच्चो को प्रभावित करते है।
वयस्कता में आमतौर पर 30 वर्ष की आयु के बाद स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी दो प्रकार के होते है ,
टाइप IV  और फिंकेल।
स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी के लक्षण – इनके लक्षण निम्नलिखित हो सकते है
एसएमए  टाइप 1   के लक्षण (Symptoms  of SMA type 1 ) 
एसएमए  टाइप 1  (जिसे इन्फेटाइल ऑनसेट या वर्डनिग -हॉफमेन रोग भी कहा जाता  है ) एसएमए  टाइप 1  के लिए शुरुआत की उम्र छह महीने तक होती है।
इनमे लक्षण शामिल है –
  • मांसपेशियों की कमजोरी।
  • रोने में दिक्क्त
  • साँस लेने, निगलने में परेशानी।
एसएमए  टाइप  2   के लक्षण (Symptoms  of SMA type 2  ) 
एसएमए टाइप  2 ( जिसे मध्यवर्ती एसएमए भी कहा जाता है ) एसएमए टाइप  2  के लिए शुरुआत की उम्र 7 से 18 महीने तक होती है।
इनमे  लक्षण शामिल है –
  • बाहों , पैरो और निचले धड़ में मांसपेशियों की कमजोरी।
  • रीढ़ की हड्डी वक्रता (स्कोलियोसिस ) अक्सर एक समस्या होती है जिसमे ब्रेसिंग और सर्जरी  की आवश्यकता होती है।
एसएमए  टाइप  3    के लक्षण (Symptoms  of SMA type 3  )
एसएमए  टाइप  3 ( जिसे कुगेलबर्ग – वैलेंडर रोग भी कहा जाता है )
एसएमए  टाइप  3 के लिए  शुरुआत की उम्र  18  महीने से 15  साल है।
इनमे लक्षण  शामिल है-
  • पैर , कूल्हे , कंधे की मांसपेशियों में कमजोरी।
  • कमजोर श्वसन की मांसपेशियां।

एसएमए  टाइप  4    के लक्षण (Symptoms  of SMA type 4  )

एसएमए  टाइप  4 (वयस्क – शुरुआत एसएमए) के  लिए शुरुआत की उम्र 18 से 50 वर्ष है।
इनमे लक्षण शामिल है –
  • झटकेदार गति।
  • निगलने में परेशानी होना।
  • भूंकप के झटकों की तरह हिलना।
 स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी  1 बीमारी इलाज  क्या है 
इस बीमारी का सिर्फ एक ही इलाज है  Zolgensma injection , जो  स्विटजरलैंड की कंपनी नोवार्टिस (Novartis ) ने तैयार किया है।  इसे  स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी से जूझने वाले बच्चे 2  साल से कम उम्र के बच्चों को लगाया जाता है।  कंपनी का दवा है की यह इंजेक्शन  एक तरह का जीन थेरेपी ट्रीटमेंट है।  जिसे एक बार लगाया जाता है।
कैसे  काम करता है यह Zolgensma injection 
स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी जिस जीन की खराबी के कारण होती है,  Zolgensma injection  उसे नए जीन से रिपल्स करता है।  ऐसा होने के बाद शरीर में दोबारा यह बीमारी नहीं होती क्योंकि बच्चे के डीएनए में न्य जीवन शामिल हो जाता है।
कितना असरदार है  Zolgensma injection 
इस इंजेक्शन का असर देखने के लिए  स्पाइनल  मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित 21 बच्चों पर क्लिनिकल ट्रायल किया गया।  ट्रायल करने के बाद नतीजे सामने आये।  नतीजों के मुताबिक 21 में से 10 बच्चे बिना किसी सपोर्ट के बैठ पाए।  यह इंजेक्शन 50 % बच्चो पर सफल रहा।
 Zolgensma injection  की कीमत  क्या है , महंगा क्यों है 
 
यह इंजेक्शन जिस देश में है उस देश की सरकार इस पर निर्धारित आयात शुल्क और दूसरे टैक्स वसूल  करती है।  नोवार्टिस के सीईओ नरसिम्हन का कहना है , जीन थेरेपी मेडिकल जगत में एक बड़ी खोज की है जो लोगो के अंदर उम्मीद जगाती है की एक डोज से पीढ़ियों तक पहुंचने वाली जानलेवा जेनेटिक बीमारी ठीक की जा सकती है।  इंजेक्शन के तीसरे चरण के ट्रायल का रिव्यू करने के बाद इंस्टीट्यूट फोर क्लिनिकल एन्ड इकोनॉमिक ने इसकी कीमत 9 से 15 करोड़ के बीच तय की थी।  नोवार्टिस ने इसे मानते हुए इसकी कीमत 16 करोड़ रूपए रखी। 

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