यूरिन इंफेक्शन (UTI ) की समस्या क्यों होती है , इसके  लक्षण , कारण , इलाज। 

क्या आपको पेशाब करते समय जलन और दर्द होता है ? बार – बार पेशाब करने का  करता है और जब  करते है तो पेशाब नहीं निकलता है ? यह पेशाब में संक्रमण के लक्षण है ? कई महिलाओं में यह बीमारी अनेक बार भी हो सकती है।  आइये जानते है की पेशाब में संक्रमण के लिए कौन कौन  से उपाय बचाव कर सकते है।
UTI (URINARY TRACT INFECTION )

 

यूरिन इंफेक्शन क्या होता है 
मूत्र मार्ग संक्रमण सूक्ष्मजीवों (बिना माइक्रोस्कोप के न दिखने वाले ) से  होने वाला संक्रमण है।  अधिकांश यूटीआई बैक्टीरिया के कारण होते है लेकिन कभी कभी यह फंगस और वायरस द्वारा भी फैलता है।  ई -कोलाई बैक्टीरया का संक्रमण इसका मूल कारण  होता है। UTI तब होता है , बी बैक्टीरिया आपके यूरिनरी ट्रैक्ट के जरिए शरीर में घुसते है और ब्लेडर व किडनी को नुकसान पहुंचाते है।
इस समस्या के कुछ कारण है जैसे – सेक्स लम्बे समय तक पेशाब रोके रखना , गर्भावस्था , रजोनिवृत्ति और शुगर।
यह संक्रमण पुरुषो की तुलना में महिलाओं में अधिक होता है।  गर्भवती महिलाओं में भी मूत्र संक्रमण होने का खतरा रहता है।  इसलिए प्रसव से पहले उनके मूत्र की जाँच कराई जाती है।

 

यूटीआई मूत्र मार्ग में कही भी हो सकता है।  मूत्र मार्ग से तातपर्य गुर्दे , मूत्रवाहिनी , मूत्रशाय और मूत्रमार्ग आदि से है।  निचले मूत्र मार्ग संक्रमण (LOWER TRACT UTI ) में मूत्रशाय और मूत्रमार्ग तथा ऊपरी हिस्से में मूत्रवाहिनी और गुर्दे प्रभावित होते है।
लगभग 40 % महिलाओं और 12 % पुरुषों को उनके पुरे जीवनकाल में कभी न कभी यूरिन इंफेक्शन होता है।
यूटीआई के प्रकार – 
(1 )  सिस्टाइटिस या मूत्रशाय का संक्रमण (Cystitis or Bladder infection ) –     यह मूत्रशाय के भीतर  वाला बैक्टीरियल संक्रमण है।  कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में यीस्ट भी मूत्राशाय के संक्रमण का कारण होता है।
(2 )  यूरेथ्राइटिस या मूत्रमार्ग संक्रमण (Urethritis or Urethra infection ) – यह भी बैक्टीरिया के  कारण होने वाला संक्रमण है।  इसमें मूत्रमार्ग ( मूत्रशाय से मूत्र को बाहर निकालने वाली नली ) में सूजन होने की वजह से मूत्र त्यागने में दर्द का अनुभव होता है।
(3 ) पाइलोनेफ्राइटिस या गुर्दा संक्रमण ( Pyelonephritis or Kidney infection )-   यह किडनी इंफेक्शन गंभीर रूप से  होने वाला संक्रमण है।  इसमें बुखार , पेशाब में खून और श्रोणि में दर्द होता है।  मूत्रवाहिनी में यह संक्रमण बहुत कम होता है।
यूटीआई कैसे व क्यों होता है 
वैसे तो यूटीआई का संक्रमण इ -कोलाई बैक्टीरिया के कारण होता है।  यह बैक्टीरिया आमतौर पर पाचन तंत्र में मौजूद रहता है क्लैमाइडिया और माइकोप्लाज्मा बैक्टीरिया से मूत्रमार्ग का संक्रमण होता  है लेकिन ये मूत्राशय को संक्रमित नहीं कर सकते है।  यूटीआई संक्रमण किसी भी लोगों में हो सकता है।  हालांकि कुछ लोगों में इसकी सम्भावना अधिक होती है।
यूटीआई निम्न कारणों से होता है –
  1. UTI का सबसे महत्वपूर्ण कारण माना गया है मूत्रमार्ग का गुदा के पास होना , आंत से आया बैक्टीरिया कभी -कभी आपके गुदा से मूत्रमार्ग में प्रवेश कर जाता है इसके बाद यह बैक्टीरिया मूत्रमार्ग से ब्लैडर और फिर किडनी तक पहुँच जाता है।
  2. पुरुषों (20 सेमी ) की तुलना में महिलाओं में मूत्रमार्ग (4 सेमी ) कम होता है , इसलिए बैक्टीरया मूत्राशय तक अधिक आसानी से पहुंचते है।  इसलिए पुरुषो की की तुलना में महिलाओ में  UTI आम है।
  3. असुरक्षित यौन सबंधों से भी बैक्टीरिया आपके मूत्रमार्ग या ब्लैडर में प्रवेश कर सकता है।
  4. मधुमेह से पीड़ित महिलाओं और पुरुषों को UTI होने का खतरा अधिक होता है क्योंकि इनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होता है और बैक्टीरिया से लड़ने में मदद नहीं कर पाता।
  5. पुरुषों की बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि या मूत्राशय में पेशाब को रोक सकती है जिससे यह संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।
  6. इनके अलावा अन्य कारण जैसे – हार्मोन परिवर्तन , किडनी की पथरी , रीढ़ की हड्डी की चोट आदि भी UTI होने के खतरे को बढ़ा सकते है।
यूटीआई के मुख्य लक्षण –
  • पेशाब करने में बहुत जलन।
  • पेशाब करने में दर्द होना।
  • पेशाब का रंग बदल जाना , चाय की तरह होना।
  • पेशाब में खून आना।
  • पेशाब में दुर्गंध आना।
  • महिलाओं के पेल्विस में दर्द होना।
  • पहले की अपेक्षा पेशाब में गाढ़ापन आ जाना।
  • बार -बार  बुखार आना।
  • फ्लेंक दर्द – यह शरीर के एक तरफ पेट के ऊपरी हिस्से और पीठ के बीच के क्षेत्र में होने वाला दर्द है।  यह पसलियों के निचे और श्रोणि के ऊपर एक ही ओर होता है।
मूत्र मार्ग संक्रमण (यूरिन इंफेक्शन ) का परीक्षण –
  • यूरिन कल्चर परीक्षण (URINE CULTURE TEST )– इस परीक्षण के माध्यम से यह पता लगाया जाता है की कौन से बैक्टीरिया के कारण संक्रमण हुआ है।  साथ ही इसी परीक्षण के अनुसार ही आपके UTI में कौन सी दवाइयां देनी है।  इस जाँच का परिणाम आने में लगभग 48  घंटे यानि 3 दिन लगते है।
  • मूत्र विश्लेषण (URINALYSIS TEST ) – यह परीक्षण आपकी लाल रक्त कोशिकाओं , सफेद रक्त कोशिकाओं और बैक्टीरिया को जानने के लिए किया जाता है।  आपके मूत्र से पाय जाने वाली सफ़ेद और लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या संक्रमण की गंभीरता के बारे में बताती है।
  • अल्ट्रासॉउन्ड या कम्प्युटराइज्ड टोमोग्राफी ( COMPUTERIZED TOMOGRAPHY TEST )– ये दोनों ही परीक्षण तब किए जाते है जब आपको इलाज के बावजूद बार -बार UTI हो रहा हो।
  • मूत्राशयदर्शन परीक्षण (CYSTOSCOPY TEST )- विशेषज्ञ आपके मूत्रमार्ग और मूत्राशय के अंदर देखने के लिए एक लम्बी पतली ट्यूब के साथ लेंस (सिस्टोस्कोप ) का उपयोग करते है।  परीक्षण की विधि को सिस्टोस्कोपी कहा जाता है।  सिस्टोस्कोपी आपके मूत्राशय से होते हुए मूत्रमार्ग में डाला जाता है।  इस जाँच को बहुत ही कम लोगों पर किया जाता है।
गर्भावस्था के दौरान पेशाब में संक्रमण (UTI )
गर्भावस्था के UTI का होना काफी कष्टदायक होता है , अगर इस संक्रमण का समय पर इलाज न किया जाए तो गर्भावस्था पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है यहाँ तक की असामयिक प्रसूति की भी आशंका होती है।  साथ ही बच्चे के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।  गर्भावस्था में UTI का खतरा ज्यादातर छठे सप्ताह से 24 वें सप्ताह के बीच रहता है।
गर्भावस्था के दौरान UTI होने के कई कारण हो सकते है जैसे – शारीरिक या हार्मोनल बदलवा होना , बैक्टीरिया , असुरक्षित यौन संबंध और ग्रुप – बी स्ट्रेप्टोकॉकस बैक्टीरिया।  गर्भावस्था में प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन बढ़ने से मूत्रवाहिनियों की मांसपेशिया शिथिल हो सकती है जिससे बैक्टीरिया पनप सकता है।
UTI के सामान्य लक्षणों के साथ गर्भावस्था में कुछ लक्षण अलग होते है जैसे – जी- मिचलाना और उलटी आना , हल्का बुखार आना , कभी गर्मी लगना , कभी ठंड महसूस होना।  गर्भावस्था के दौरान आपको इस तरह के लक्षण दिखाई देते है तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर इलाज शुरू कराएं।  बिना कोइ लक्षण  दिखे गर्भावस्था 12 वे या 16 वे सप्ताह में यूरिन कल्चर  परीक्षण कराना चाहिए, क्योंकि  संक्रमण होने से पहले उसकी रोकथाम की जा सकती है।
UTI की रोक- थाम के लिए कुछ असरदार घरेलू उपाय –
  • पानी अधिक  मात्रा में पिएं, 6 से 8  गिलास रोजाना।  इससे जल्दी -जल्दी पेशाब आने से बैक्टीरिया पेशाब के माध्यम से बाहर निकल जाता है।
  • विटामिन -सी ज्यादा मात्रा में ले इससे पेशाब की अम्लता बढ़ती है जो बैक्टीरिया को खत्म करने में कामगार होती है।
  • क्रेनबेरी (करोंदे ) का जूस पियें , क्रैनबेरी जूस बैक्टीरिया को मूत्र पथ में बढ़ने से रोकता है जिससे संक्रमण कम होता चला जाता है।
  • अपनी निजी सफाई का ध्यान रखे जैसे -रोज नहाना , ढीले अंदरूनी कपड़े पहनना और उन्हें रोज बदलना , बाथरूम जाने पर मूत्रमार्ग की अच्छे से सफाई करना।
  • पेशाब को रोक कर न रखे हर 2 -3 घंटे में मूत्राशय को खाली करते रहें।
  • असुरक्षित यौन संबंधो से बचें।
  • बादाम की 5 -7 गिरी , छोटी इलायची और मिश्री को पीस ले और इसे पानी में डालकर पिने से दर्द व जलन में राहत मिलती है।
  • नारियल पानी पिये।  इससे मूत्रत्याग के समय होने वाली जलन से राहत मिलती है।  यह पेट को भी ठंडा करने का काम करता है।
  •  दो चम्मच सेब का सिरका और एक चम्मच शहद को एक गिलास गुनगुने पानी  में मिलाकर पियें।  यह पेशाब के रास्ते में संक्रमण होने पर लाभ पहुंचाता है।
  • मूत्र संक्रमण में छाछ एवं दही  का सेवन बहुत लाभदायक है।  यह शरीर में मौजूद बैक्टीरिया को बाहर निकालते है।
यूटीआई इंफेक्शन से बचाव –
  • शराब और कैफीन के सेवन से दूर रहे , ये मूत्राशय में संक्रमण पैदा कर सकते है।
  • सम्भोग के पश्चात् तुरंत बाद मूत्र त्याग करें।
  • जननांगो  को साफ रखें।
  • माहवारी के दौरान टेम्पोन की जगह सेनेटरी पैड का उपयोग करे।
  • कॉटन के अंडरवियर पहनें।
  • यूटीआई को नियंत्रित करने में योगासन लाभकारी होते है जैसे – भुजंगासन , मत्स्यासन , व्रजासन।  प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट का व्यायाम हर दिन करे। इसके साथ ही चलना , दौड़ना आदि एरोबिक व्यायाम हो सकते है।

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